
कामां :- राजस्थान के ब्रज क्षेत्र, भगवान श्री कृष्ण की क्रीड़ा स्थली कामां (कामवन) में साल भर में एक बार भोजनथाली मेला एवं कुश्ती दंगल का आयोजन किया जाता है जो उत्तर भारत का बहुत ही प्रसिद्ध मेला होता है। इस मेले में पांच दिवसीय/कभी छः दिवसीय रात्रि सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नगरपालिका द्वारा आयोजित किए जाते हैं। जिसमें पांचवें या छठे दिन अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाता है जिसमें अलग अलग क्षेत्रों से कवि आमंत्रित किए जाते हैं और लॉकडाउन से पहले तक की इस मेले की परंपरा रही कि इसमें एक संयोजक और साथ में दो और कवि मतलब लगभग तीन मंचीय कवि कामां के होते थे अन्य कवि बाहर के होते थे। उसके बाद जब 2022 में इस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया तो नगरपालिका ने कामां के किसी भी मंचीय कवि को तवज्जो नहीं दी केवल बाहर के कवि बुलाए गए और संयोजक भी कामां से बाहर के थे। उनकी दलील थी कि कामां का चाहे कोई कितना भी बड़ा कवि हो लेकिन उसको अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में नहीं लिया जाएगा क्योंकि उसका कसूर इतना है कि वो कामां में जन्मा है। नगरपालिका का कहना था कि कामां के सभी कवियों के लिए स्थानीय कवि सम्मेलन कर रहे हैं। उस स्थानीय कवि सम्मेलन में नगरपालिका ने गोष्ठी वाले कवियों और मंचीय राष्ट्रीय कवियों को भीड़ की तरह आमंत्रित कर दिया और उस कवि सम्मेलन में ना कोई मानदेय, ना कोई सम्मान दिया गया जबकि नगरपालिका ने मानदेय के लिए आमंत्रित कवियों के अकाउंट नंबर लिखित में लिए थे। इसके बारे में जब कवि डी के जैन मित्तल ने तत्कालीन कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी दिनेश चंद शर्मा जी से बात की तो उन्होंने कहा कि उनके पास आमंत्रित कवियों से ज्यादा कवियों की लिस्ट आई थी इसलिए आमंत्रित कवियों का भी पेमेंट रोक दिया गया। उनसे जब कहा कि आप नगरपालिका द्वारा आमंत्रित कवियों को तो भुगतान करवाएं तो बोले अगले साल यानी इस साल 2023 में डबल करवा देंगे।
अब इस साल कामां शहर की जनता की और पार्षदों की मांग के बावजूद भी कवि डी के जैन मित्तल (वाह भाई वाह फेम) को अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन में अवसर नहीं दिया जा रहा है, जो देश के पांच बड़े राज्यों के अलग अलग शहरों में बड़े बड़े मंचों पर और नामी राष्ट्रीय टीवी चैनल पर भी तारक मेहता फेम अन्तर्राष्ट्रीय कवि शैलेश लोढ़ा के आमंत्रण पर काव्यपाठ कर चुके हैं। जब इस बारे में बात की गई तो कहना था कि कामां का कोई कवि अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में नहीं लिया जाएगा। इसका मतलब ये हुआ कि कामां के कवि को प्रतिभा की मौजूदगी होते हुए भी केवल इसलिए नहीं लिया जा रहा क्योंकि वह कामां में जन्मा है। यहां ये कहावत चरितार्थ होती है कि “घर का जोगी जोगना आन गांव का सिद्ध”। मतलब जिस बस्ती में इतना बड़ा मेला हो रहा है और अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का इतना बड़ा बजट इस पर खर्च किया जाता है वहां पर यह बस्ती का दुर्भाग्य है कि इस बस्ती की उभरती और चमकती हुई मंचीय प्रतिभा को भी नगर पालिका अवसर प्रदान नहीं करती है।
