
सुरेन्द्र मिनोचा
एमसीबी :- सरकार द्वारा गांव-गांव में स्कूल और सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। ताकि ग्रामीण इलाकों को सड़क से जोड़कर उनका विकास किया जा सके और गांवों में स्कूल बनाकर वहां के बच्चों को शिक्षित किया जा सके, लेकिन मनेंद्रगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत चनवारीडांड में कुछ और ही मामला देखने को मिला है। यहां पर स्कूल पढ़ने वाले बच्चों,आंगनबाड़ी जाने वाले बच्चों को स्कूल जाने के लिए बरसात के समय जान जोखिम में डालकर रपटा पार करना पड़ता है क्योंकि बारिश के दिनों में रपटा जलमग्न हो जाता है और पानी इस रपटा के ऊपर से बहने लगता है। ज्ञात हो कि यह रपटा लोको रेलवे कॉलोनी और ग्राम पंचायत चनवारीडांड को आपस में जोड़ने का काम करता है।ग्राम पंचायत चनवारीडांड कार्यालय और बौरीडांड जाने के लिए यह एक शॉर्टकट रास्ता है इसलिए इस रास्ते का उपयोग नागरिकों द्वारा ज्यादा मात्रा में किया जाता है।रपटा के इस पार रेलवे कॉलोनी में रहने वाले छात्र छात्राएं रपटा के उस पार स्थित स्कूल में अध्ययनरत हैं। जिन्हें बरसात के समय में जान जोखिम में डालना पड़ रहा है।पंचायत द्वारा जो रपटा बनाया गया है,वह भी इतना घटिया निर्माण किया गया कि वर्तमान में यह रपटा जीर्ण शीर्ण अवस्था में है।जिससे निकलने में अनहोनी का डर हमेशा सताता रहता है। रपटा को क्रॉस करने वाला दूसरा रास्ता तो है, लेकिन उस रास्ते से जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी और समय भी लगेगा।इसलिए स्कूल के बच्चे एवं ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर प्रतिदिन और बारिश के समय इस को पार करते हैं। अब ऐसे में पंचायत द्वारा कोई भी प्रयास नहीं किए जा रहे ताकि स्कूल के पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल जाने के लिए रास्ता मिल सके। पंचायतों में लाखों रुपए का आवंटन होता है। इसके बावजूद भी गांव के विकास के लिए पंचायत कोई कार्य करने पर ध्यान नहीं देती हैं।जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है।
वहीं छात्रों का कहना है कि टूटे हुए रपटा से निकलते समय डर लगता है। कई बार हम स्कूल जाते समय गिर कर घायल भी हो चुके हैं,और तो और बारिश के मौसम में तो हम लोग स्कूल बड़ी ही मुश्किल से जा पाते हैं क्योंकि रपटा पर ज़्यादा पानी आ जाता है।स्कूल जाने के लिए प्रतिदिन खतरों का सामना करते हुए रपटा के ऊपर से बहते हुए पानी में से निकलना पड़ता है। कई बार स्थानीय लोगों ने शिकायत की है। लेकिन ज़िम्मेदार अधिकारी ध्यान नही दे रहे हैं। इस संबंध में ग्राम पंचायत चनवारीडांड की सरपंच गौरी सिंह ने बताया कि पंचायत द्वारा इस रपटा का निर्माण लगभग 20 से 25 वर्ष पूर्व करवाया गया था। बरसात के दिनों में स्कूली छात्र छात्राओं एवं ग्रामीणों को होने वाली परेशानी को देखते हुए उनके द्वारा विधायक से इस बाबत मौखिक चर्चा कर मांग की गई थी तथा पंचायत इस दिशा में सार्थक प्रयास कर रही है ताकि भविष्य में लोगों को परेशानी का सामना ना करना पड़े।
