राजिम :- विश्व चॉकलेट दिवस के अवसर पर शुक्रवार को शाम 5:00 बजे सब्जी मंडी प्रांगण पर पावस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, सावन महीने के आगमन पर रिमझिम बरसात के बीच कवियों ने बढ़ चढ़कर कविताएं सुनाएं। मौके पर उपस्थित कार्यक्रम के अध्यक्षता करते हुए ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष विष्णु राम जांगड़े ने कहा कि साहित्य की परिभाषा जीवन की सच्चाई को उजागर करती है। राजिम धर्म क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध है उसी तरह से साहित्य के लिए पूरी दुनिया में इनका अपना अलग नाम है। पंडित सुंदरलाल शर्मा से लेकर वर्तमान में लिखने वाले कवियों की रचनाएं देश-विदेश में लगातार सफर कर रही है तथा सम्मानित भी हो रहे हैं। यह माटी की खुशबू है जो चहुं और महक बिखेर रही है। उन्होंने आगे कहा कि लिखना और उसे प्रस्तुत करना दोनों का अपना अलग-अलग महत्व है यहां के कवि न सिर्फ लिखते हैं बल्कि कवि सम्मेलन या काव्य गोष्ठी या फिर अन्य माध्यमों से अपनी पहचान भी बनाये हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि विश्व चॉकलेट दिवस पहली बार 7 जुलाई सन् 2009 में मनाया गया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए गोकुल सेन हास्य चुटकुले पर खूब हंसाया और चुटीले अंदाज में व्यंग्य रचना सुनाते हुए कहा कि रावण मारने चले आज के रावण, रावण जरा सभ्य था असभ्य है ये रावण, रावण ने तो एक हरा, यहां हजार हरे जाते हैं। युवा शायर जितेंद्र सुकुमार साहिर ने शेरों शायरी करते बरसात के मौसम पर शेर कहा- लहराते हर फसलों में बचपन देखिए, हर इक मंजर में अपनापन देखिए, चाहत में ज़मीं के बरस रहे हैं ऑंसू, आज आसमाॅं का दीवानापन देखिए, सुन सभी वाह वाह कह उठे। व्यंग्यकार संतोष सेन ने हास्य का माहौल बनाते बेबाक रचना पढ़ते हुए, कहा कि आदमी की जिंदगी की शुरुआत पेट से चालू होती है और इसी पेट के जुगाड़ में आदमी मर जाता है, मस्तिष्क अगर बाप है तो पेट उसका नालायक औलाद है मस्तिष्क हमेशा ईमानदारी बनाए रखना चाहता है मगर पेट उसे बेईमान बना देती है। अगर पेट संसद है तो मस्तिष्क योजना आयोग का अध्यक्ष है। कवि एवं साहित्यकार संतोष कुमार सोनकर मंडल ने जीवन की मार्मिक सच्चाई को नई कविता के माध्यम से उजागर करते हुए कहा कि बुढ़ापा जब सताता है, प्रत्येक इच्छा खुद से छूट जाता है, जवानी के स्मरण में सारा समय गंवाकर मृत्यु के आगोश में समा जाता है, क्या यही जीवन का आलम है, धर्म परोपकार को छोड़ धर्म का पालन है, यदि इसी का नाम जिंदगी है, तो मनुष्य के वरदान का, क्या मकसद।
