राजिम विधानसभा में टिकट मांगने वाले प्रत्याशियों की हलचल बढ़ी l 

राजिम :- विधानसभा चुनाव की तारीखें ज्यो ज्यो नजदीक आती जा रही है राजनीतिक पार्टियों में सरगर्मी देखने को मिल रही है। टिकट मांगने वाले नेताओं में हलचल बढ़ गई है। पिछले 25 सालों का इतिहास देखें तो कांग्रेस ने अमितेश शुक्ला को हर बार अपना प्रत्याशी बनाया। वह पहली बार अविभाजित मध्यप्रदेश में चुनाव जीते और नए छत्तीसगढ़ प्रदेश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री बनाए गए। छत्तीसगढ़ के चार पंचवर्षीय चुनाव में दो बार जीते तो दो बार हारे। राजिम विधानसभा में कांग्रेस की राजनीति विधायक पद पर  शुक्ला के इर्द-गिर्द ही घूमती है। कांग्रेस ने भूलकर भी शुक्ला परिवार से हटकर किसी को प्रत्याशी नहीं बनाया। पिछला सन् 2018 में हुए आम चुनाव में कांग्रेस ने इतिहास बना दिया और 58000 वोटो से अमितेश शुक्ला ने जीत दर्ज कराई। पूरे प्रदेश में दूसरे नंबर पर सर्वाधिक मत से लीड करने के कारण राजिम विधानसभा खूब सुर्खियों में रहे। राजनीतिक जानकारों की माने तो इस बार भी  शुक्ला की विधायक प्रत्याशी पद पर टिकट पक्की मानी जा रही है। यह बात अलग है कि हर बार की तरह इस बार भी कांग्रेस से ही चुनाव लड़ने के लिए अनेक नेताओं के नाम उभर रहे हैं परंतु मुखर होकर कोई सामने नहीं दिख रहा है। हां जनता को मलाल जरूर है कि इन 20 वर्षों में राजिम विधानसभा क्षेत्र से एक भी मंत्री नहीं बनाया गया, जिसके कारण क्षेत्र का विकास धीमा माना जा रहा हैं। चुनाव में हर बार यही बात दोहराई जाती रही कि आप विधायक नहीं बल्कि मंत्री चुन रहे हैं। जीतने के बाद सब थोथा चना बाजे घना कहावत को चरितार्थ किया है। इधर भाजपा से छत्तीसगढ़ प्रदेश में हुए विधानसभा के चारों चुनाव में दो बार ही उनके प्रत्याशी जीत पाएं। पहली बार चंदूलाल साहू तथा तीसरे चुनाव में संतोष उपाध्याय जीते। छत्तीसगढ़ में भाजपा के 15 वर्षीय कार्यकाल के दौरान विधानसभा क्षेत्र में दो बार भाजपा के विधायक रहे और एक बार कांग्रेस के विधायक ने विधायकी की। स्पष्ट तौर पर दिख रही है कि राजिम विधानसभा के आम चुनाव में भाजपा कांग्रेस दोनों राष्ट्रीय दल को एक के बाद एक विधायक पद मिला है। भाजपा से इस बार जनता नए चेहरे की तलाश में दिख रही है। वह नया चेहरा कौन हो सकता है समय के गर्भ में छिपा हुआ है। भाजपा के छत्तीसगढ़ प्रभारी  माथुर लगातार मुख्यालय में पहुंचकर बैठकें कर रहे हैं। गत दिनों प्रेम रतन मैरिज पैलेस के सभा हाल में कार्यकर्ताओं से मोदी की योजनाओं को बताकर चुनाव जीतने के मंत्र देते रहे। उनके सामने विधानसभा के तमाम टिकट चाहने वाले नेताओं की लंबी फेहरिस्त लगी रही।

दो दलों के अलावा अन्य दल भी दिखा सकते हैं दमखम

हर बार की तरह भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी राजिम विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करते आ रहे हैं। यहां तीसरे और चौथे दल ने अभी तक चुनाव जीतने की स्थिति तक नहीं पहुंचे हैं हां यह बात जरूर रही है कि पिछले चुनाव में जोगी कांग्रेस के रोहित साहू ने जनता के बीच अपनी अच्छी पैठ जमाए थे परंतु इस बार वह भाजपा के हो गए हैं। बाहरहाल आम आदमी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी की एक्टिविटीज हल्के फुल्के दिखाई दे रही है। हो सकता है चुनाव के मद्देनजर अपनी सक्रियता बढ़ाकर समीकरण में उलटफेर कर सकते हैं।

            जिले की मांग प्रमुख मुद्दा

राजिम जिले की मांग इस बार के विधानसभा चुनाव में प्रमुख मुद्दा हो सकता है। वैसे यहां की जनता मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान राजिम जिले बनाने की मांग को तुल दिए थे। उन्होंने कम समय होने की बात कहते हुए पल्ला झाड़ दिया था। परंतु उनके दिमाग में राजिम जिला की बात जोरदार ढंग से पहुंची है। अभी भी कुछ कहा नहीं जा सकता कि मुख्यमंत्री कब क्या घोषणा कर दे। हर बार की तरह राजिम विधानसभा प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखा है। यह धर्म नगरी होने के साथ-साथ प्रदेश का सबसे बड़ा मेला एवं सबसे बड़ा तीर्थ स्थल है इस लिहाज से लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं।