भगवान जगन्नाथ को नहलाने आषाढ़ में पहली बार गिरा पानी l 

 राजिम :- धर्म नगरी में जगन्नाथ भगवान का रथ यात्रा में रथ को खींचने के लिए आतुर भक्तगण रथ के पीछे पीछे दौड़ रहे थे और भगवान की जयकारा तेज आवाज के साथ हो रही थी। बताना होगा कि रथदूतिया पर्व के अवसर पर लोगों की उत्सुकता खासतौर से देखी जा रही थी। सुबह से ही तैयारियां हो रही थी और जैसे ही शाम 4:00 बजे उसके बाद तो भगवान की एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़ी। उल्लेखनीय है कि भगवान राजीवलोचन मंदिर के दायी ओर महाप्रभु जगन्नाथ का मंदिर स्थापित हैं। गर्भगृह में भगवान जगन्नाथ बलभद्र एवं सुभद्रा विराजमान है। सुबह से ही पूजा अर्चना एवं भोग प्रसादी चढ़ाया गया। शाम होते ही तैयार रथ में भगवान जगन्नाथ निकले। श्रद्धालुओं ने गाजा मूंग का प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान भगवान को कोई मिठाई तो कोई सब्जी की टोकरी तथा नाना प्रकार के खाद्य पदार्थ समर्पित किये और पुजारी गजामूंग का प्रसाद दिये। आषाढ़ में पहली बार गिरा पानी, इस बार आषाढ़ लगे हुए 17 दिन गुजर गये लेकिन अभी तक पानी नहीं गिरा है। मानसून के इंतजार में किसान बादल की ओर टकटकी लगाए हुए

उम्मीद में बैठे हुए हैं। मंगलवार को भी सुबह से तेज उमस एवं गर्मी से लोग हलकान रहे, अचानक 5:00 बजे भगवान जगन्नाथ को नहलाने के लिए 15 मिनट के लिए ही सही बारिश हुई और भगवान जगन्नाथ को स्नान करा दिया इससे किसान तो खुश हुए लेकिन गर्मी से थोड़ी राहत भी मिली।

       उड़ीसा के नृतकों ने किया शानदार नृत्य

रथ के सामने पारंपरिक वाद्य यंत्र पर उड़ीसा के नृत्तको के द्वारा शानदार नृत्य किया गया। लोग इनके नृत्य को देखकर अभिभूत हो गए और ताली भी बजाते रहे। बताया जाता है कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ की राजिम की सांस्कृतिक धरोहर मेल खाते हैं। इसीलिए ओडिशा के प्रभु जगन्नाथ के दर्शन के पश्चात राजीवलोचन का दर्शन अनिवार्य माना गया है। मिलने वाले चावल का अटिका प्रसाद राजिम और जगन्नाथ में प्राप्त किया जाता है।

पिछले साल से भगवान के भ्रमण का रूट बदला

पिछले साल से भगवान जगन्नाथ के रथ यात्रा का रूट बदला हुआ है इस बार भी मंदिर से निकल कर सुभाष चौक होते हुए गौरव पथ से आगे बस स्टैंड, गोवर्धन चौक, महामाया चौक के पश्चात महामाया मंदिर में रात्रि विश्राम किया। बुधवार को भी भगवान नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे। इस दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ देखी गई तथा आम और गजामूंग का प्रसाद ग्रहण किए।