
राजिम :- शहर से लगा हुआ चौबेबांधा राजिम परसवानी पुल के जॉइंट में गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। जितनी स्तंभ है उतने जॉइंट है किसी किसी जॉइंट पर गड्ढे हैं तो किसी पर गिट्टी से उभार आ गई है। समतल नहीं होने के कारण वाहन धारियों को गाड़ियां आराम से चलानी पड़ती है कहीं रफ्तार हो जाए तो गिरने का डर बना रहता है। वैसे भी इस पुल पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी है। पिछले लगभग 12 सालों से जॉइंट को भरने की मांग हो रही है लेकिन विभाग की उदासीनता के चलते राहगीरों को परेशान होना पड़ रहा है इस दौरान भाजपा और कांग्रेस दोनों दल की सरकार आई पर किसी को इस पुल की मरम्मत करने की नई सूझी। अलबत्ता डामरीकरण के नाम पर बड़ी-बड़ी एवं मोटी गिट्टियां तकरीबन 6 साल पूर्व बिछाई गई थी। डामरीकरण करने वाले ठेकेदार ने बारिक गिट्टी से चिकनी सड़क बनाना भूल गए जिनका खामियाजा आज भी लोग उठा रहे हैं। पैदल चलने पर नुकीली गिट्टी पांव में चुभ जाते हैं। जॉइंट स्पीड ब्रेकर का काम कर रही है।

अघोषित स्पीड ब्रेकर के चलते पुल पर अनेक दिक्कतें राहगीरों को झेलनी पड़ रही है। बता देना जरूरी है कि संत कवि पवन दीवान के प्रयास से अविभाजित मध्यप्रदेश के समय नाबार्ड से राजिम को धमतरी जिला से जोड़ने के लिए राशि स्वीकृति दिलाई थी। पूर्व मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ला ने भूमि पूजन किया था। सन् 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह लोकार्पण किया। तब से लेकर 18 वर्ष बीत गए। इस दरमियां पुल के जॉइंट को नहीं भर पाए। उल्लेखनीय है कि चौबेबांधा पुल के बन जाने पर गरियाबंद जिला के लोगों को धमतरी जिला पहुंचने में काफी सहूलियत हुई है। धमतरी जिला के तकरीबन 50 गांव के लोग राजिम शहर लेन देन, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार,रोजी रोजगार आदि के लिए बड़ी संख्या में इसी मार्ग को पारकर पहुंचते हैं। यह पुल क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए वरदान बन गया है। जॉइंट को सुधारने तथा सड़क की नुकीली गिट्टी पर बारिक गिट्टी डालकर चिकनी करने की मांग राहगीरों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पीडब्ल्यूडी मंत्री ताम्रध्वज साहू, पूर्व मंत्री एवं विधायक अमितेश शुक्ल से की है।
नवीन मेला ग्राउंड से लगा हुआ चौबेबांधा पुल
चौबेबांधा राजिम परसवानी पुल नवीन मेला ग्राउंड से लगा हुआ है प्रदेश सरकार के द्वारा आने वाला वर्ष में इसी स्थल पर मेला लगाने की पूरी तैयारियां हो रही है। पूजा घाट बनाए जा रहे हैं। इसके लिए मंत्री ताम्रध्वज साहू ने अनेक निर्माण कार्य होने की जानकारी अपने एक दिवसीय नवीन मेला ग्राउंड निरीक्षण के दौरान बताए थे। मेला होने की दशा में पुल पर आवागमन का दबाव बढ़ेगा। वैसे भी चौबीसों घंटे राहगीरों का आना जाना लगा रहता है। यह व्यस्त मार्गो में से एक है। कहना होगा कि माघी पुन्नी मेला के समय सारी गाड़ियां डायवर्ट होकर राजधानी रायपुर से गरियाबंद देवभोग के लिए इसी मार्ग से आना-जाना करते हैं। मेला के समय बड़ी मुश्किल से मात्र पुल के दोनों किनारे के रेत को हटाए जाते हैं। पहले रंग रोगन होते थे अब वह भी नहीं होते। रोलिंग को पोंछ दिया जाता है।
