वृद्धावस्था पेंशन के नाम पर बुजुर्गों को २० रुपये रोज ३५ लाख लोगों को उपलब्ध कराती है शिवराज सरकार?

भोपाल-अवधेश पुरोहित


भोपाल :- छह पूडिय़ां, अचार और दो सौ रुपये नगद देकर भीड़ जुटाकर अपनी सरकार की लोकप्रियता जनता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने बताकर केन्द्रीय नेतृत्व यानि जिनकी बदौलत शिवराज सिंह को सत्ता पर काबिज होने का अवसर मिला उन सिंधिया को यदि मुख्यमंत्री बनाने के लिये केंद्रीय मंत्री अमित शाह से कहते हैं तो वह दबे स्वर में इसी तरह की जुटाई गई भीड़ की बदौलत अमित शाह से यह कहने से नहीं चूकते कि यह भी सोच लो कि भाजपा के ५० से ६० विधायक कांग्रेस में जाने को तैयार हैं? इस तरह की धमकी व खाओ और खाने दो की नीति से प्रदेश में हर कार्य में फर्जी आंकड़ों की रंगोली सजाकर रुपये हड़पने की स्कीम पर चलने वाली शिवराज सरकार इस प्रदेश के बुजुर्गों पर कितनी मेहरबान है उन्हें वह ६०० रुपये वृद्धावस्था पेंशन प्रतिमाह देती है यानि २० रुपये रोजाना के हिसाब वे वह भी उन्हें समय पर नहीं मिला पाता? हां, यह जरूर है कि बुजुर्गों को दी जाने वाली ६०० रुपये पेंशन का पालन करते हुए शिवराज सरकार के वित्त मंत्री जो अपने ही क्षेत्र के मतदाताओं के जहरीली शराब से हुई मौतों के बदले में शराब कारोबारी के पुत्र से सोने की चेन लेने में जरा भी परहेज नहीं करते उनके यहां यह नियम है कि उनके निजी स्टाफ में जो कोई भी मिलने जाता है तो उसे वह पारले जी की २० रुपये की बिस्किट का पैकेट उसे थमाने में जरा भी गुरेज नहीं करते? जिस दिन कुशभाऊ ठाकरे कन्वेंशन हॉल में नरेन्द्र मोदी के शासनकाल के नौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अपने भाषण के दौरान यह दावा कर रहे थे कि कांग्रेस शासन में राजीव गांधी कहते थे कि दिल्ली से एक रुपया जाता है उमसें मात्र १५ पैसे पहुंचते हैं? उन्हें यह कहने में शर्म आ रही थी कि जिस कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में उज्जैन में बने महाकाल लोक की स्वीकृति दी गई थी और जब वह बनकर तैयार हो गया तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर कमलों से उसका लोकार्पण कराया जा रहा था तो उस समय यह झूठ बोलो और जोर से बोलो और सौ बार बोलो की नीति का पालन करने वाले प्रदेशाध्यक्ष को इस महाकाल महालोक को मोदी की परिकल्पना गला फाड़कर लोगों को बता रहे थे और यह सिलसिला कई दिनों तक चला अब वह जरा सी आंधी में धराशायी हो गया तो प्रधानमंत्री मोदी की परिकल्पना वाले महाकाल लोक का घड़ा कांग्रेस पर फोडऩे में लगे हुए हैं लेकिन उन्हें यह कहने में शर्म आ रही है कि कांग्रेस शासन में एक रुपया चलता था और व्यक्ति के पास १५ पैसे पहुंचते थे? लेकिन भाजपा के लोगों को यह कहने में शर्म आ रही है कि शिवराज की खाओ और खाने दो की नीति के चलते ८० प्रतिशत कमीशन का खेल चलता है? जिसका जीता जागता उदाहरण महाकाल महालोक में देखने को मिला? पता नहीं अब धर्म के नाम पर और भाजपा द्वारा कितना भ्रष्टाचार किया जायेगा यह तो भविष्य के गर्भ में है? पर लोगों में यह चर्चा चटखारे लेकर की जारही है? कि धर्म के नाम पर शिवराज सरकार के आबकारी मंत्री  देवता अपने मतदाताओं की जहरीली शराब से 14 मतदाताओं की मृत्यु हो जाने शराब करो बारी के बेटे से सोने की चैन भेंट में लेने के बाद भी भाजपा हाईकमान की तो बात छोडिये मुख्यमंत्री ने भी  देवढा से कुछ नहीं कहा?