राजिम :- 24 मई विधानसभा मुख्यालय राजिम में अविभाजित मध्यप्रदेश के समय कृषि उपज मंडी खोला गया था। तब से लेकर आज तक मंडी ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं इस उतार चढ़ाव में किसान तब भी परेशानी झेल रहे थे और अब भी तपती धूप में धान बेचने को मजबूर है। छत्तीसगढ़ राज्य सन् 2000 में बना उसके बाद तो विकास ने अमलीजामा पहना लेकिन राजिम मंडी के सभी फड़ में आज तक छाया के लिए शेड का निर्माण नहीं करा पाए हैं। वर्तमान में रबी फसल धान की आवक बढ़ी हुई है। प्रतिदिन 18000 से भी अधिक कट्टे धान की आवक हो रही है। ऐसे में जिस फड़ में शेड़ लगा हुआ है वह काफी नहीं है नतीजा खुले फड़ में धान रखी जा रही है। भीषण गर्मी के इस मौसम में सुबह 8:00 बजे से ही सूर्यदेव अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर देते हैं तेज धूप में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में किसान अपनी उपज को बेचने के लिए मंडी में ले जा रहे हैं और पहले तो धान की बोरी खाली कर ढेरी लगाते हैं उसके बाद बोली होती है फिर खरीदने वाले के बोरी पर पेक किया जाता है। यह सारे काम किसान करते हैं या फिर मजदूरों से कराई जाती है ऐसे में किसान सुबह से लेकर शाम तक तपती धूप में काम करने को मजबूर है।
4 फड़ में नहीं लगा शेड
वैसे तो राजिम मंडी बहुत बड़ा है जहां धान बेचने के लिए सौ किलोमीटर से भी अधिक दूरी के किसान आते हैं और अपने ऊपज को बेचकर उनसे प्राप्त पैसों से परिवार का पालन पोषण करते हैं। शेड की कमी से किसान पसीने पसीने हो जा रहे हैं। अलबत्ता छाया में रखें किसानों का धान बोली के अलावा तौल,भराई आदि कार्य शीघ्र हो गए, यहां तक कि तौल करने वाले भी धूप में काम करने से बचते रहे। जबकि किसान धान को तोलने का पैसा देते हैं बावजूद इसके इंतजार करना पड़ रहा है।
किसानों ने प्रदेश शासन से शीघ्र शेड लगाने किया मांग
वहां बैठे किसान सोमन पटेल, भीखम, महेश, दिनेश, सूर्य, देवनारायण, संतोष सोनकर, हरिश्चंद्र, रामकुमार इत्यादि किसानों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कृषि मंत्री के अलावा राजिम विधायक अमितेश शुक्ला से शीघ्र मंडी के सभी फड़ में शेड़ लगाने की मांग की है।
