बस स्टैंड का पूरा काम सड़क पर।
रिपोर्टर संतोष सोनकर
राजिम :- छत्तीसगढ़ का प्रयागराज राजिम छत्तीसगढ़ राज्य बन जाने के 23 साल बाद भी बस स्टैंड के लिए मोहताज है न यहां बसों के रुकने के लिए स्टॉपेज बनाई गई है और न ही यात्रियों के सुविधा का ख्याल रखते हुए उनके ठहरने के लिए यात्री प्रतीक्षालय की व्यवस्था की गई है। प्रदेश के छोटे से छोटे शहर तथा कस्बा में सर्व सुविधा युक्त बस स्टैंड बना दिया गया है सरकार के द्वारा लाखों करोड़ों रुपया पास कर यह सुविधा दी गई है लेकिन छत्तीसगढ़ के प्रयागराज जहां देश विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक प्रतिदिन आवागमन करते हैं बावजूद इसके बड़ी शर्मिंदगी होती है कि शहर आए हुए लोगों को सर्व सुविधा युक्त बस स्टैंड नहीं मिल पाता। चिरमिरी से मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे एक श्रद्धालु ने तो कह दिया कि हम तो राजिम का बस स्टैंड भव्य होगा समझ रहे थे लेकिन यहां तो सारे कार्य रोड के ऊपर ही हो रहे हैं। विकास के नाम पर नाम बड़े दर्शन छोटे के कहावत को चरितार्थ कर रही है। इसी तरह से आने जाने वाले श्रद्धालु ना जाने अपने मन में कौन सा विचार पालकर यहां से जाते हैं। अस्थि विसर्जन, पिंडदान, स्नान दान एवं मंदिर दर्शन तथा पर्यटन के लिए सैकड़ों की संख्या में प्रतिदिन श्रद्धालु उपस्थित हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि राजिम जंक्शन तीन गरियाबंद, महासमुंद, धमतरी जिला एवं राजधानी रायपुर से जुड़ा हुआ है। धमतरी महासमुंद एवं राजधानी रायपुर की दूरी लगभग 45 किलोमीटर तक ही है तथा धमतरी जिला की दूरी 65 किलोमीटर है। इन शहरों तक के लिए यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री वाहन चलती हैं। राजिम से ही 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवभोग के लिए राजधानी रायपुर से देवभोग प्रतिदिन एक्सप्रेस बसें निकलती है। अधिकतर राजधानी जाने वाले यात्री वाहन सड़क पर ही अपने वाहन को खड़ा करते हैं और वहीं पर यात्रियों को उतारने एवं बिठाने का काम करते हैं। महासमुंद एवं देवभोग गरियाबंद के लिए जाने वाली बस सड़क को घेर लेते हैं इससे आने-जाने वाले यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बस स्टैंड तो है नहीं इसलिए मजबूरी में ही सड़क के ऊपर बस को खड़ा करना पड़ता है। यात्री प्रतिक्षालय पंडित सुंदरलाल शर्मा चौक में नहीं होने के कारण यात्रीगण पेड़ के छांव के नीचे बैठे रहते हैं कई बार तो उन्हें छांव भी नसीब नहीं होती। अलबत्ता धूप में ही इंतजार करना पड़ता है। जानना जरूरी है कि यह वही राजिम शहर है जिन्होंने अविभाजित मध्यप्रदेश के समय तीन बार मुख्यमंत्री दिए। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद प्रदेश का प्रथम पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री राजिम विधानसभा ने दिया। विधानसभा मुख्यालय होने के नाते यहां प्रदेश के तमाम बड़े से लेकर छोटे नेता एवं मंत्री पहुंच चुके हैं लेकिन बस स्टैंड का सपना अभी भी अधूरा का अधूरा है। शायद इन्हें पूरा कराने वाले मसीहा का इंतजार हो रहा है। इस संबंध में इसी वर्ष माघी पुन्नी मेला के समय प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया पहुंचे उन्होंने सर्व सुविधा युक्त बस स्टैंड के लिए 2 करोड़ रुपए देने की घोषणा भी कर दी। 13 फरवरी को घोषणा किए हैं। 91 दिन गुजर गए हैं। यानी 3 महीना कंप्लीट हो गए हैं और अभी तक कहां पर बस स्टैंड बनना है स्थल का भी चयन नहीं किया गया है। ऐसे में क्या बस स्टैंड का सपना पूरा हो पाएगा यह चिंता का विषय बना हुआ है। कुछ दिन पहले नगर पंचायत के प्रतिनिधिगण जिला कलेक्टर गरियाबंद के पास गए थे लेकिन कहां पर बस स्टैंड मूर्त रूप लेगा अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। आम यात्रियों को सिर्फ सर्व सुविधा युक्त बस स्टैंड की दरकार है जो कब तक मूर्त रूप लेगा इसका इंतजार बेसब्री से हो रही है। इस संबंध में नगर पंचायत सीएमओ चंदन मानकर ने बताया कि बस स्टैंड के संबंध में अभी जमीन डिसाइड नहीं हुआ है।
