
राजिम :- पितईबंद से पोखरा मार्ग निर्माण का कार्य आदेश 27 अक्टूबर 2021 व अनुमानित लागत 1981.50 लाख रुपए था जिस कार्य को 14 माह यानी दिसंबर 2022 तक पूर्ण करना था जो आज पर्यंत अधूरा है। सड़क निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो पाने के कारण आसपास के ग्रामीण और आने जाने वाले राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग पर दुर्घटना होने की आशंका हमेशा बनी रहती है। मार्ग निर्माण के ठेकेदार की लापरवाही और विभाग के अधिकारियों की उदासीनता स्पष्ट रूप से नजर आ रही है। ग्राम रावड़, बकली के ग्रामीण सूरज साहू, सोमन साहू, भानुप्रताप, महावीर यदु, धर्मेंद्र ध्रुव इत्यादि ने बताया कि जब से सड़क निर्माण शुरू हुआ है तब से लेकर अब तक हम लोग बहुत परेशान हैं। सड़क पर गिट्टी बिछाने से आवागमन में काफी परेशानी हो रही है। सड़क पर न तो साइकल व बाइक चलाई जा सकती है और न ही पैदल चला जा सकता है। सड़क के किनारे मुरूम की जगह मिट्टी डाला जा रहा है। निर्माण भी गुणवत्ताहीन है। निर्माण अवधि समाप्त हो जाने के बाद भी निर्माण पूर्ण नहीं हुआ है विभाग के ऐसे ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने की मांग की गई है। लोक निर्माण विभाग गरियाबंद के ईई अनुज शर्मा ने बताया कि अवधि पूरा होने के बाद भी सड़क निर्माण कार्य अधूरा होने के बारे में मैं कल दस्तावेज देखकर बताऊंगा।
इधर आमापारा सड़क पर हो रहे अक्सर दुर्घटनाएं-हाल ही में शिवाजी चौक से लेकर पितईबंद पहुंच मार्ग तक सड़क निर्माण किया गया है चौड़ीकरण के साथी इन्हें दो-तीन सालों में पूर्ण किया गया है ठेकेदार के द्वारा बनाए गए सड़क में खामियां नजर आ रही है जिसके कारण अक्सर दुर्घटनाएं होते रहते हैं जबकि सड़क के चोरी होने के बाद दुर्घटनाओं पर विराम लगना चाहिए लेकिन इस सड़क मार्ग पर एक्सीडेंट होना आम बात हो गया है। गत दिनों बाइक सवार दो लोगों की दुर्घटना में मृत्यु हो गई जिससे पूरा मोहल्ला सहमा हुआ है।
3 महीने में ही क्यों पड़ी पैच वर्क की जरूरत-डेट से 2 किलोमीटर की लंबी इस सड़क मार्ग के लिए करोड़ों रुपए की राशि स्वीकृत हुए थे। ठेकेदार नई सड़क मार्ग को इस तरह से बनाया कि 2 से 3 महीने के अंतराल में ही पैच वर्क की जरूरत पड़ गई है और पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारी अपने कर्मचारियों को भेजकर सड़क पर पेच वर्क कराए हैं। इससे साफ जाहिर होता है के ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के चलते सड़क की गुणवत्ता ही नहीं है। शिवाजी चौक से लेकर आमापारा तथा पितईबंद मार्ग की दशा से राहगीरों के अलावा शहर के लोग चिंतित है लेकिन विभाग की उदासीनता समझ से परे है।
