अवधेश पुरोहित भोपाल

भोपाल :- आरएनएस मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में ही जब इस प्रदेश की सरकार की व्यवस्था के चलते शराब की घर पहुंच सेवा नहीं थी, उस समय राजधानी में महापौर चुनाव के दौरान जब पार्टी के प्रत्याशी आलोक शर्मा का प्रचार करने मुख्यमंत्री अपनी पत्नी साधना सिंह के साथ जब राजधानी की झुग्गी बस्तियों में प्रचार-प्रचार करने गये थे तो उनसे अधिकांश महिलाओं ने यह शिकायत की थी कि अभी तक तो शराब की दुकानें कम समय तक खुलती थीं अब रात के ११ बजे तक खुलेंगी तो उनके पति शराब पीकर आयेेंगे और सारी रात उनकी पिटाई ही करेंगे? हालांकि मध्यप्रदेश में महिलाओं के साथ बदसलूकी के ज्यादा मामले हैं, इसके बाद भी प्रदेश की स्थिति यह है कि अभी तक तो बातें हमेशा पत्नियों के पिटने की होती थीं लेकिन मप्र के आंकड़े बताते हैं कि पतियों के पिटने के भी सैंकड़ों शिकायतें सामने आई हैं इस तरह के मामले में प्रथम सूची में मप्र की औद्योगिक शहर इंदौर पहले नम्बर पर है जहां पतियों के पिटने की ११३७ शिकायतें मिली हैं। पतियों क पिटाई के मामले में भोपाल दूसरे नम्बर पर है यहां ९०९ मामले पतियों के पिटने के प्रकाश में आये हैं। तीसरे पायदान पर जबलपुर है जहां पतियों के पिटाई के ७१७ मामले सामने आये हैं। पतियों से पिटने के मामले में मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का लोकसभा क्षेत्र छिंदवाड़ा जो कि पिछले २०१८ का विधानसभा चुनाव उसे मॉडल के रूप में पेश करके चुनाव लड़ा था वहां पतियों के पिटने के मामले ६२५ रहे। पतियों से पिटने के मामले में रीवा पांचवें स्थान पर है जहां ५४० पतियों की पिटाई के मामले घटित हुए। मप्र का पुलिसिया आंकड़ों पर तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार एक अंग्रेजी समाचार पत्र के अनुसार विगत पांच सालों में पतियों के पिटाई के मामले सामने आए। डायल १०० पर फोन लगाकर पति पत्नी के जुल्म के मामले सामने आये हैं, ज्यादातर मामलों में छोटे भाई या बहन बताती है कि भाभी भैया को पीट रहे हैं, वहीं अन्य मामलों में डायल १०० पर फोन कर पुलिस को बताते हैं? मप्र के पुलिसियिा आंकड़ों के अनुसार जनवरी २०१८ से मार्च २०२३ तक आंकड़े कह रहे हैं कि पतियों के पिटाई के १४६६० शिकायतें अभी तक प्रदेश में दर्ज हुई हैं? वर्ष २०१८ में पतियों के पिटाई के मामले २०७३ दर्ज हुए थे? २०१९ में यह आंकड़ा २२०० के पार पहुंच गया था? वहीं २०२० में इसमें कमी आई थी, लेकिन फिर २०२३ में यह आंकड़ा अभी तक के सारे रिकार्ड को तोड़ गया? २०२२ में १३०३ शिकायतें मिली थी लेकिन इस साल का आंकड़ा ११०० से ऊपर है, २०१८ से २०२३ तक के बीच महिला के बदसलूकी करने का मामले मप्र में लाखों में हैं? यदि आंकड़ों को तोलेंगे तो पत्नियों की पिटाई या बदलसूकी कहीं ज्यादा है? मगर यह अभी कम मामले पर शिवराज सरकार द्वारा भाजपा की बैतरणी पार कराने के लिए जो मध्यप्रदेश की आधी आबादी महिला मतदाताओं को रिझाने के लिए सहारिया आदिवासियों की महिलाओं को लोकसभा चुनाव के.समय एक हजार रुपए प्रतिमाह उनको देने की घोषणा की थी, उन महिलाओं की क्या स्थिति है जारा के हमारे जागरूक पत्रकार प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में जाकर उनसे जानकारी लेने की मेहरवानी करें और उनसे जानकारी लें कि शिवराज सरकार के द्वारा एक हजार उनके खाते में डालने के बाद उनकी हालात कैसे हैं ? शराब के लिए पैसे मांगने की घटनाओं के बाद उन शिवराज की ” लाडली बहनाओं की स्थिति भी वही होने बाली है? जिससे महिलाएं. के द्वारा पतिओं के साथ मारपीट करने घटनाओं में मध्यप्रदेश की उद्योग नगरी इन्दौर नम्बर वन है जून जुलाई के बाद मध्यप्रदेश के शराबी पतिओं द्वारा पैसे के लिए पत्तियों के साथ पिटाई की बढने की संभावना व्यक्त का संकेत मध्यप्रदेश डायल १०० की अफसर वीना सिंह ने जानकारी देते हुए बताया ज्यादातर मामले झुग्गी बस्तियों के सामने आते हैं, जहां शराब पीकर घर पर आने वाले पतियों का स्वागत झाड़ुओं और बेलन से होता है?
