जनपद में हुए डेढ़ करोड़ से ज्यादा के घपले का सामान्य सभा के बैठक में उपाध्यक्ष ने सार्वजनिक किया गया।

देवभोग :- जांच रिपोर्ट। मोटी रकम वाले मदों में 93 बार किया गड़बड़ी।बड़ा आरोप ऑपरेटरों को बाबू बनाने लिए गए लाखों के रिश्वत में 3 लाख 42 हजार जनपद मद के थे। उपाध्यक्ष सुखचन्द बेसरा के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव ध्वस्त होने के बाद आज जनपद समिति की पहली बैठक थी।सामान्य प्रसाशन की बैठक पहले हुई, फिर दूसरे सत्र में सामान्य सभा की बैठक शुरू हुई।बैठक में तय एजेंडे के मुताबिक जनपद विकास निधि में आये 40 लाख रुपये के आबंटन व कार्ययोजना पर चर्चा करना था।चर्चा शुरू भी हुई, इसी चर्चा के बीच मे ही उपाध्यक्ष ने पुर्व में हुए गड़बड़ियों पर कार्यवाही की मांग कर निंदा प्रस्ताव लाने पर डटे रहे, पर अन्य सदस्य राजी नहीं हुए। 17 पन्नो के जांच रिपोर्ट को जनपद उपाध्यक्ष ने पढ़ कर कहा कि 1 करोड़ 56 लाख की गड़बड़ी करने जनपद विकास निधि, स्टाम्प शुल्क, शिक्षा मद, सांसद मद के अलावा विवेकानंद योजना में 93 बार गड़बड़ियां की गई और जवाबदार शांत बैठे रहे। नाम लिए बगैर ही जनपद अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए मिलीभगत का भी आरोप लगाया। बाबु बनाने जनपद मद से ली गई रिश्वत- बेसरा ने जांच प्रतिवेदन में उल्लेख स्टाम्प शुल्क मद से दो अस्थाई कर्मचारियों को किये गए 3 लाख 42 हजार के भुगतान पर सवाल उठाया, इस भुगतान को जांच दल ने नियम विरुद्ध तो बताया ही है, पर इन कर्मियों ने प्राप्त सारे राशि को सीईओ व लिपिक के हांथो देना स्वीकार किया है।आहरण के बाद पैसे दिए जाने की वजह को नियुक्ती के बदले ली जाने वाले रिश्वत बताया। वाहन किराए में रखने निविदा नियम का पालन नही-जांच रिपोर्ट के मूताबिक मनरेगा निर्माण कार्य के निरीक्षण के लिए जिस स्कॉर्पियो क्रमांक सीजी 23 के 9990 को 34500 रुपये मासिक किराए पर लिया गया वह जनपद अध्यक्ष के दुकान में कार्यरत कर्मचारी का है। मनरेगा साखा के अलावा जनपद में भी उपयोग बता कर भुगतान बताया गया, रिपोर्ट के मूताबिक वाहन लगाने निर्धारित निविदा नियम का पालन नहीं किया गया है। एक ही दिन में 6 लाख का सेनेटाइजर- कोरोना काल मे प्रत्येक पँचायत लगभग 1 लाख रुपये सेनेटाइजर पर खर्च किया, स्वास्थ्य विभाग ने भी इसी सामग्री के लिए लाखों फूंका, बावजूद जनपद मद से 32लाख 47 हजार के सेनेटाइजर इलेक्ट्रॉनिक व स्टेशनरी दुकान से क्रय करना बताया गया है। कोविड के आड़ में 60 लाख से ज्यादा फूंका गया जिसे जांच दल ने अनियमितता माना है। किससे कितना वसूली देखे सूची- जांच दल के रिपोर्ट के मूताबिक जनपद में 3 साल में 1 करोड़ 5654152 रुपये की अनियमितता बताया है।जिसमें 1 करोड़ 47 लाख 87626 रुपये सीईओ एम एल मंडावी से वसूली योग्य बताया गया है। चूंकि आहरण वितरण की सम्पूर्ण जवाबदारी सीईओ की होती है, ऐसे में बन्दरबांट में कई लोगो ने मजा मारा पर जवाबदार होने के नाते इसका हरजाना सीईओ को भरना पड़ा।