महाकाल और महारात्रि का पर्व महाशिवरात्रि इसी दिन भगवान शंकर निराकार से साकार रूप मे आए।

महाकाल और महारात्रि का पर्व महाशिवरात्रि इसी दिन भगवान शंकर निराकार से साकार रूप मे आए।
शिवरात्रि अर्थात भगवान महाकाल शिव की महान रात्रि।इसे ही कहा जाता “महाशिवरात्रि”।
हमारा देश हिंदुओं का देश है जहाँ पर धर्म के प्रति विशेष आस्था देखते बनती है।हर पर्व और जयंती किसी न किसी आस्था परम्परा से जुड़ी हुई होती है।
इसी कड़ी में आता है महाशिवरात्रि का धार्मिक पर्व।महाशिवरात्रि भगवान शिव का महान पर्व है।यह पर्व माघ फागुन कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी को मनाया जाता है।
ऐसा माना जाता है की इसी दिन से सृष्टि का आरंभ हुआ था।और यह भी माना जाता है की इस सृष्टि का आरंभ “अग्निलिंग” जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है से उदय हुआ।और इसी दिन भगवान शिव का विवाह, माता पार्वती से हुआ था।
वर्ष में होने वाले शिवरात्रियों में से “महाशिवरात्रि” को सबसे महत्वपूर्ण
माना जाता है।
महाशिवरात्रि का विशेष महत्व-
यह पर्व आध्यात्मिकता का पर्व है।यह साधकों के  लिए अत्यधिक महत्व रखता है।यह उनके लिए भी महत्व है जो पारिवारिक परिस्थितियों में रहकर भी सांसारिक महत्वाकांक्षाओं में मग्न रहते हैं।
महाशिवरात्रि को शिव जी के द्वारा अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के दिवस के रूप में भी जाना जाता हैं।
महाशिवरात्रि एक प्रकाश का पर्व भी-
महाशिवरात्रि माह का सबसे अंधकार पूर्ण दिन होता है।इस पर्व को मनाना मानो तर्क शील के अंधकार को नकारते हुए अपने जीवन में सद ज्ञान के प्रकाश को स्वीकार करना है।
महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है-
महाशिवरात्रि का पर्व मनाने के पीछे बहुत सारे आध्यात्मिक और धार्मिक कारण है।अलग- अलग धर्म ग्रंथों मे अलग-अलग कारण बताए गए हैं।ऐसा माना जाता है कि आरम्भ में भगवान शिव निराकार स्वरूप मे थे।
और वे इस स्वरूप से
फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर आधी रात को भगवान शिव निराकार से साकार रूप में आए।और यह भी माना जाता है कि इसी दिन से ही सृष्टि का प्रारम्भ हुआ।और यही वह पावन दिवस था जब भगवान् शिव जी करोड़ों सूर्य को लज्जित कर देने वाले, तेजस्वी स्वरूप वाले लिंग के रूप में प्रकट हुए थे।
फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को ही  माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह का दिन माना जाता हैं। महाशिवरात्रि को माह का सबसे अंधेरा दिन माना जाता है। और ऐसी मान्यता है की  इस दिन भगवान शिव जी नकारात्मक शक्तियों का नाश करते है।
महाशिवरात्रि है एक अवसर-
महाशिवरात्रि एक आस है, विश्वास है,एक पावन अवसर है,ऐसे समय पर हम अपने भीतर और दूसरों के भीतर असीम रिक्तता में शिव-शक्ति का आभास करते हैं। जो कि सारे सृजन- शीलता का स्त्रोत है।
भगवान भोले नाथ को संहारक कहा जाता है,तो दूसरी ओर उन्हे भोले भंडारी भी माना जाता है। वो बहुत ही उदार और अभय दाता भी हैं।
महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व-
भगवान शिव को जितना सांसारिक लोग मानते हैं, कहीं उससे ज्यादा आध्यात्मिक लोग मानते हैं।भगवान शिव एक संहारक के पहले महाज्ञानी भी हैं।और इनको ही आदि गुरु कि संज्ञा दी जाती हैं।और सबसे पहले इन्होने ज्ञान प्राप्त किया था।और फिर उस ज्ञान को पूरे सृष्टि मे प्रसार भी किया।
जिन्होंने सबसे पहले ज्ञान प्राप्त किया और उस ज्ञान का प्रसारण किया।और जिस दिन उन्होंने ज्ञान कि चरम सीमा को प्राप्त किया उसी दिन को “महाशिवरात्रि” के नाम से जाना जाता हैं।
भगवान भोले नाथ “सत्यम शिवम् सुंदरम” हैं।
भगवान शिव की अराधना करके सांसारिक जीवन के अन्धकारमय से छुटकारा पाया जा सकता हैं।यह संसार मोह, माया, मत्सर से ग्रसित हैं।भगवान शिव की अराधना से इससे मुक्ति पाया जा सकता हैं।और फिर वह मनुष्य उसी शिव मे सामाहित होकर परम धाम को प्राप्त करता है।
आशोक पटेल “आशु”
तुस्मा शिवरीनारायण (छ ग)
9827874578