मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की भव्यता टेराकोटा शिल्पकार  अशोक चक्रधारी ने भव्यता खुशी

पारंपरिक मिट्टी कला के संरक्षण के साथ ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को बढ़ावा दिया जा रहा है.

कोंडागांव – छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा कोंडागांव के टेराकोटा शिल्पकार  अशोक चक्रधारी को पत्र लिखकर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी गई। मुख्यमंत्री की आत्मीय प्रशिक्षित समधी श्री चक्रधारी ने अपनी प्रजा की प्रशंसा की।मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में  अशोक चक्रधारी के पारंपरिक मिट्टी कला के प्रतिपादन, नवाचार और कला के संरक्षण के प्रयासों की घोषणा की। उन्होंने उल्लेख किया कि श्री चक्रधारी ने अपने पिता स्वर्गीय  कार्तिक राम चक्रधारी से मिट्टी को आकार देने की कला सीखी और चार दशक से अधिक समय तक इस पारंपरिक कला को वापस लाने और नई पहचान बनाने का काम किया। उन्होंने मिट्टी के दीयों में तेल निर्देशन के लिए ‘माजिक दीया’ जैसे कई नवीनताएं कर अपनी कला को और विशिष्ट बनाया है।

श्री चक्रधारी पारंपरिक शिल्पकला को बढ़ावा देने के साथ-साथ शासन के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान में भी सक्रिय चल रहे हैं। स्थानीय हस्तशिल्प एवं कुम्हारों द्वारा निर्मित मूर्तियों को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं। उनके प्रयास से पारंपरिक कला को नई पहचान मिलने के साथ अन्य कुम्हार परिवारों को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।मुख्यमंत्री ने अपने शिल्प कार्य में परिवार के सहयोगी की भूमिका निभाते हुए अन्य कुम्हार परिवारों की कलाकृतियों के प्रति अपनी चिंता जाहिर की और उन्हें रोजगार से जोड़ने के प्रयास को भी बताया। श्री चक्रधारी को राज्य पुरस्कार और राष्ट्रीय योग्यता प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ, उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत और कला के प्रति सम्मान का सम्मान है।मुख्यमंत्री ने अपने घर में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था और बबूल में पेड़-पौधों के संरक्षण की भी सबसे पहले सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि श्री चक्रधारी जैसे अनुभवी शिल्पकारों से नई पीढ़ी प्रेरणा लेकर पारंपरिक कला को आगे बढ़ाएगी और विकसित भारत-दलित छत्तीसगढ़ 2047 के संकल्प में अपना योगदान देगी।मुख्यमंत्री की इस आत्मीयता से असहमति व्यक्त करते हुए श्री अशोक चक्रधारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने कार्य एवं प्रोत्साहन के लिए जो काम किया है वह उनके लिए गौरव और प्रोत्साहन का विषय है। वे मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति हृदय से मुखातिब हुए।