धमतरी के वनों में पर्यटन को मिल रहा नया विस्तार, जबरा में नाइट ट्रेक एवं कैंपिंग का आयोजन

तीन राज्यों के 11 शहरों से 46 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल

धमतरी – प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध वनांचल, जल संसाधनों और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध धमतरी जिले में पर्यटन की विविधता को विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में ऐसे पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है, जहाँ पर्यटक प्रकृति, धार्मिक आस्था और स्थानीय संस्कृति का अनुभव एक साथ प्राप्त कर सकें। इसी क्रम में गंगरेल क्षेत्र में जल पर्यटन एवं कयाकिंग के साथ अब वनग्राम जबरा में नाइट ट्रेक एवं कैंपिंग का आयोजन किया गया। इस पहल से जिले के वन क्षेत्रों में प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावनाएँ सामने आई हैं।

जिले के प्राकृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों को पर्यटन से जोड़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं विकास के अवसरों को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

जबरा नाइट ट्रेक एवं कैंपिंग में तीन राज्यों के प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (YHAI) की धमतरी इकाई द्वारा 24 और 25 अक्टूबर 2026 को वनग्राम जबरा में दो दिवसीय नाइट ट्रेक एवं कैंपिंग का आयोजन किया गया। धमतरी में सहयोगी श्री ओंकार साहू ने सिहावा चौक से अभियान दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में तीन राज्यों के 11 शहरों से आए कुल 46 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

दो दिवसीय आयोजन के दौरान डोंगरी ट्रैकिंग, बेस कैंप, कैंपफायर तथा नदी और घने जंगलों के बीच रात्रिकालीन ट्रेकिंग जैसी साहसिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इनमें 20 प्रतिभागियों ने नाइट ट्रेक में हिस्सा लिया। दूसरे दिन आयोजित 15 किलोमीटर लंबा ट्रेल भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। प्रतिभागियों ने वन क्षेत्र के प्राकृतिक परिवेश में रोमांचक अनुभव प्राप्त करने के साथ आपसी सहयोग और टीम भावना के साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया।

शरद पूर्णिमा की रात खीर का आनंद

कार्यक्रम में साहसिक पर्यटन के साथ भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का भी समावेश किया गया। शरद पूर्णिमा के अवसर पर रात 12 बजे प्रतिभागियों ने पारंपरिक अमृत खीर का आनंद लिया। प्रतिभागियों ने स्वयं भोजन तैयार कर सामूहिक सहभागिता और आत्मनिर्भरता का परिचय भी दिया।

इस अवसर पर सेफ भव फाउंडेशन के डॉ. संदीपन सनस्क्रीन ने सड़क सुरक्षा एवं विद्युत सुरक्षा के संबंध में जागरूकता सत्र आयोजित किया। उन्होंने प्रतिभागियों को सुरक्षित व्यवहार अपनाने और सुरक्षा नियमों का पालन करने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। स्थानीय समिति के सहयोग से आयोजित इस अभियान के दौरान प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।

गंगरेल से जबरा तक पर्यटन की विविध संभावनाएँ

कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा ने कहा कि धमतरी जिले में गंगरेल प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है, जहाँ जल पर्यटन और कयाकिंग जैसी गतिविधियाँ पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। वहीं, जबरा का प्राकृतिक वातावरण कैंपिंग, ट्रैकिंग और नेचर ट्रेल जैसी गतिविधियों के लिए उपयुक्त अवसर प्रदान करता है। ऐसे प्राकृतिक आकर्षणों के माध्यम से पर्यटकों को प्रकृति के निकट समय बिताने और स्थानीय परिवेश को समझने का अवसर मिल सकता है।

जिले में सिहावा क्षेत्र का श्रृंगी ऋषि आश्रम, महानदी का उद्गम क्षेत्र, कर्णेश्वर महादेव मंदिर, रुद्रेश्वर मंदिर और माँ अंगारमोती मंदिर सहित अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल भी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इन स्थलों के माध्यम से जिले में पर्यटन के विभिन्न स्वरूपों को बढ़ावा दिया जा सकता है।

स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसर

पर्यटन का विस्तार स्थानीय युवाओं और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर विकसित करने में सहायक हो सकता है। पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि से स्थानीय गाइड, कैंप प्रबंधन, भोजन व्यवस्था, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य पर्यटन संबंधी सेवाओं से जुड़े लोगों को प्रोत्साहन मिल सकता है। इसके लिए स्थानीय समुदाय की भागीदारी, प्रशिक्षण और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।

वन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों के संचालन के दौरान पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जैव विविधता की सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी आवश्यक है। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

जबरा में नाइट ट्रेक एवं कैंपिंग का आयोजन धमतरी जिले में साहसिक और प्रकृति आधारित पर्यटन की संभावनाओं को सामने लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जिला प्रशासन, पर्यटन से जुड़े संगठनों और स्थानीय समुदाय के समन्वित प्रयासों से जिले की प्राकृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन से जुड़े अवसरों को बढ़ावा दिया जा सकता है।