जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर उठने लगे सवाल
नवापारा राजिम :- ग्राम पंचायत पारागांव स्थित हनुमान एग्रो परिसर में निजी एवं सरकारी जमीन पर लगे पेड़ों की कटाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि पेड़ों की कटाई के लिए सीमित प्रजातियों की अनुमति ली गई, लेकिन मौके पर अन्य प्रजातियों के वृक्षों को भी काट दिया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पेड़ों की कटाई निर्धारित अनुमति और नियमों के दायरे में की गई?
जानकारी के अनुसार, संबंधित परिसर में 75 सागौन और 700 नीलगिरी के पेड़ों की कटाई की अनुमति लेकर कार्य किए जाने की बात सामने आई है। लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि अनुमति में उल्लेखित प्रजातियों के अलावा दूसरे प्रजातियों के पेड़ों की भी कटाई की गई है। यदि यह आरोप सही है, तो मामले में अनुमति की शर्तों और संबंधित नियमों के पालन की जांच आवश्यक हो जाती है।
*शिकायत के बाद भी कार्रवाई पर संशय*-
इस मामले में शिकायतकर्ता द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), अभनपुर को लिखित शिकायत सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद अब तक जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से किसी ठोस कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। मामले की जानकारी लेने पर अनुमति के आधार पर पेड़ों की कटाई किए जाने की बात कहकर जिम्मेदारी से बचने का आरोप भी लगाया गया है।
*अनुमति के नाम पर क्या नियमों की अनदेखी हुई?*-
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कटाई के दौरान वन विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के लागू नियमों का पालन किया गया? क्या निजी और सरकारी जमीन पर मौजूद सभी पेड़ों की कटाई के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी? यदि अनुमति केवल कुछ प्रजातियों के लिए थी, तो अन्य वृक्षों की कटाई किस आधार पर की गई?
अब प्रशासन को स्पष्ट करना होगा कि पेड़ों की कटाई नियमानुसार हुई या अनुमति की आड़ में नियमों की अनदेखी की गई। मामले की निष्पक्ष जांच, अनुमति संबंधी दस्तावेजों के सत्यापन और मौके पर कटे पेड़ों की प्रजातिवार गणना से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
