सड़क सुरक्षा और जनहित के मुद्दे पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू, भारी वाहनों के आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग
पखांजूर – सुरजागढ़ माइंस से लौह अयस्क लेकर परलकोट क्षेत्र की सड़कों से गुजरने वाले भारी वाहनों के खिलाफ अब जनआक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। क्षेत्र की सड़क सुरक्षा, लगातार बढ़ती दुर्घटनाओं की आशंका, प्रदूषण तथा जर्जर हो रही सड़कों को लेकर परलकोट सुरक्षा समिति ने शनिवार को अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। समिति ने भारी वाहनों के आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है।
भारी वाहनों से सड़क पर बढ़ रहा दबाव
परलकोट क्षेत्र की प्रमुख सड़कों को क्षेत्र की लाइफ लाइन माना जाता है। समिति का आरोप है कि सुरजागढ़ माइंस से लगातार भारी-भरकम लौह अयस्क वाहनों के आवागमन के कारण सड़कों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कें क्षतिग्रस्त होने के साथ ही धूल और प्रदूषण की समस्या भी बढ़ रही है। इससे आम लोगों, राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों तथा आसपास के ग्रामीणों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।परलकोट सुरक्षा समिति का कहना है कि विकास और रोजगार के नाम पर आम जनता की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। समिति ने मांग रखी है कि क्षेत्र की सड़कों पर भारी वाहनों के आवागमन को स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जाए और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
सांसद के निर्देश के बाद भी वाहनों का आवागमन जारी होने का आरोप
मामले को लेकर समिति ने प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं।
समिति के अनुसार 31 अगस्त को सांसद भोजराज नाग ने क्षेत्र का दौरा कर सड़कों का निरीक्षण किया था और स्थानीय लोगों से चर्चा के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस दौरान मरोड़ा क्षेत्र में बैरिकेड लगाकर माइंस के भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई थी।
समिति का आरोप है कि इसके बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई और कुछ समय बाद वाहनों का आवागमन फिर शुरू हो गया। समिति ने इसे प्रशासनिक निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़ा करने वाला विषय बताया है।
*स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं की मौजूदगी*
अनिश्चितकालीन आंदोलन के दौरान स्थानीय स्तर के विभिन्न जनप्रतिनिधियों मौजूदगी भी देखने को मिली। आंदोलनकारियों ने एकजुट होकर कहा कि यह किसी एक व्यक्ति अथवा संगठन का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे परलकोट क्षेत्र की सड़क सुरक्षा और जनहित से जुड़ा सवाल है।
परलकोट सुरक्षा समिति की ओर से मोनिका साहा ने कहा कि क्षेत्र की सड़क सुरक्षा और आम जनता की समस्याओं से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि यदि भारी वाहनों का आवागमन इसी तरह जारी रहा तो भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं, प्रदूषण और सड़क क्षति जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।
“हमारा संघर्ष…हमारे अधिकार और हमारा भविष्य”
आंदोलन के लिए लगाए गए बैनर में समिति ने “हमारा संघर्ष… हमारे अधिकार… हमारा भविष्य” का संदेश दिया है। साथ ही लोगों से अपने क्षेत्र, स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की गई है।
समिति ने स्पष्ट किया है कि जब तक भारी वाहनों के आवागमन को लेकर ठोस और स्थायी निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस आंदोलन को लेकर क्या कदम उठाता है और क्षेत्र की सड़कों पर भारी वाहनों के संचालन को लेकर क्या स्थायी व्यवस्था बनाई जाती है।
फिलहाल सुरजागढ़ माइंस के भारी वाहनों का मुद्दा परलकोट में राजनीतिक और सामाजिक रूप से गरमाता नजर आ रहा है। आंदोलन के आगे बढ़ने के साथ प्रशासन और माइंस प्रबंधन की भूमिका पर भी लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
