‘निरंजन भट्टा’ को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले स्वर्गीय श्री लीलाराम साहूकार के योगदान का सम्मान

पारंपरिक बैंगन की किस्म के संरक्षण एवं PPV&FRA पंजीकरण की पहल

धमतरी – धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड के कुरूद, दर्रा निवासी स्वर्गीय लीलाराम साहूकार द्वारा वर्षों से संरक्षित ग्राम पारंपरिक और विशिष्ट बैंगन गायक ‘निरंजन भट्ट’ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के साथ उनके उल्लेखनीय योगदान का आज सम्मान किया गया। कलेक्टर  अविनाश मिश्रा ने कलेक्टर कार्यालय में स्वर्गीय  लीलाराम साहूकार के पुत्र  अजय शंकर साहूकार को उनके पिता के कृषि क्षेत्र में योगदान, पारंपरिक कृषि ज्ञान के संरक्षण और स्थानीय जैव-विविधता के लिए नामांकित किया।

शोधकर्ता  अविनाश मिश्रा ने इस पर स्वर्गीय श्री लीलाराम भंडारी के योगदान की घोषणा करते हुए कहा कि पारंपरिक खेती की विरासत केवल कृषि की विरासत नहीं है, बल्कि किसानों के अवसर से एकत्रित ज्ञान, अनुभव और स्थानीय जैव-विविधता की अमूल्य खदानें हैं। ‘निरंजन भाटा’ जैसे स्थानीय सांस्कृतिक संरक्षण और उनके राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण धमतरी जिले के लिए गौरव की बात है। उन्होंने स्वर्गीय श्री लीलाराम साहूकार परिवार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जिले के अन्य किसानों को भी पारंपरिक कृषि क्षेत्र के संरक्षण, उनकी स्वीकृति और नामांकन के लिए प्रेरित करने का प्रयास करें।

विशिष्ट गुणवत्ता वाली पारंपरिक बैंगन कृति है ‘निरंजन भाटा’

स्वर्गीय श्री लीलाराम साहू ने लंबे समय तक पारंपरिक रूप से ‘निरंजन भट्टा’ बैंगन फिल्म का संरक्षण किया। यह मसाला अपने विशिष्ट गुणों के कारण अलग-अलग पहचान का है। इसके फल लंबे, फ़्रैंचाइज़ी, सॉलिड गुड वाले और आंशिक कम बीज वाले होते हैं। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार इसके फलों की औसत लंबाई लगभग 45.8 है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से प्रचलित इस स्मारक को संरक्षित रखे गए खंड श्री साहू ने इसे व्यापक रूप से पहचानने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किया।

पीपीवी&एफआरए के तहत वर्ष 2024 में पंजीकरण हुआ

‘निरंजन भाटा’ जैसे स्थानीय एवं पारंपरिक कृषि अनुसंधान और संवैधानिक अधिकार को सुनिश्चित करने की दिशा में विज्ञान केंद्र, धमतरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा स्वर्गीय श्री लीलाराम साहू को अनाज के संरक्षण, दस्तावेज़ीकरण एवं पंजीकरण की प्रक्रिया में आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन और सहायता प्रदान की गई।

पीपीवी एवं एफआरए के प्रभारी  प्रेमलाल साहू द्वारा नामांकन से संबंधित छात्रों को आवश्यक सहायता, मार्गदर्शन एवं समन्वय प्रदान किया गया। सतत सिद्धांत ‘निरंजन भाटा’ का वर्ष 2024 में वृक्षारोपण एवं सांस्कृतिक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (पीपीवी और एफआरए) के तहत नामांकन किया गया। यह उपलब्धि किसानों के पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय कृषि जैव-विविधता के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिल ने प्लांट लाख रुपए का सम्मान दिया है

स्वर्गीय  लीलाराम साहू के संरक्षण के लिए 2016-17 के लिए राष्ट्रीय स्तर पर किसान सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। पीपीवी और एफआरए द्वारा दिए गए प्रमाण-पत्र के अनुसार उन्हें 1.50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि, प्रमाण-पत्र और स्मृति-श्रृंग प्रदान की गई थी। यह सम्मान 22 अक्टूबर 2019 को प्रदान किया गया।

इसके अलावा ‘निरंजन भाटा’ फिल्म में उनके नवाचार एवं पारंपरिक ज्ञान के लिए नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन-इंडिया द्वारा आयोजित नौवें राष्ट्रीय ग्रासरूट टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन एंड ट्रेडिशनल नॉलेज अवार्ड्स के तहत राज्य पुरस्कार-छत्तीसगढ़ से भी सम्मानित किया गया था। कृषि क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान और ‘निर्जन भाटा’ जैसे विशिष्ट पारंपरिक पौधों के संरक्षण के लिए उन्हें ‘छत्तीसगढ़ सर्वश्रेष्ठ कृषि उत्पाद’ वर्ष 2022 के सम्मान से भी नवाजा गया।

पारंपरिक ज्ञान और कृषि जैव-विविधता संरक्षण का प्रेरक उदाहरण

स्वर्गीय श्री लीलाराम साहू की यह उपलब्धि इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि किसानों द्वारा संरक्षित पारंपरिक कृषि ज्ञान को तकनीकी सहयोग, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और विचारधारा के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है। न केवल स्थानीय कृषि जैव-विविधता को सुरक्षित बनाए रखने में सहायक है, बल्कि भविष्य के लिए महत्वपूर्ण आनुवंशिक एवं कृषि-विविधता को भी संरक्षित करने में सहायक है।

कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी द्वारा किसानों के बीच स्थानीय एवं पारंपरिक कृषकों की पहचान, संरक्षण, पंजीकरण एवं लोकतंत्र के प्रति जागरूकता हेतु निरंतर कार्य किया जा रहा है। ‘निरंजन भाटा’ का पीपीवी&एफआरए पंजीकरण इस दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

सम्मान समारोह में कृषि विज्ञान केन्द्र, धमतरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डाॅ. ईश्वर सिंह एवं सहायक सलाहकार कृषि श्री मनोज सागर संबंधित अधिकारी उपस्थित रह रहे हैं।

स्वर्गीय श्री लीलाराम साहू का योगदान धमतरी जिले की कृषि परंपरा, स्थानीय जैव-विविधता और सांस्कृतिक ज्ञान की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने वाला है। ‘निरंजन भट्ट’ को राष्ट्रीय पहचान मिली, जो उनके प्राचीन गुणों और संरक्षण गुणों की सार्थकता का प्रतीक है और जिले के किसानों के लिए गौरव और वाली आने वाले स्मारक के लिए प्रेरणा का स्रोत है।