राजिम – भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर बुधवार को राजिम सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हलषष्ठी (हरछठ) का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर माताओं ने विधि-विधान से व्रत रखा और पूजा-अर्चना की।
हलषष्ठी के अवसर पर महिलाओं ने घर एवं पूजा स्थल पर छठी माता की स्थापना कर पूजा की। पूजा में 6 प्रकार के अनाज सहित विभिन्न पारंपरिक सामग्री का उपयोग किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी को समर्पित है। इसी कारण हलषष्ठी में हल और कृषि से जुड़ी परंपराओं का विशेष महत्व माना जाता है।

पंचांग के अनुसार इस वर्ष षष्ठी तिथि 2 सितंबर की सुबह शुरू होकर 3 सितंबर की सुबह तक रहेगी। सूर्योदय के आधार पर हलषष्ठी का व्रत 2 सितंबर को ही रखा जा रहा है।
हलषष्ठी पर्व राजिम की ग्रामीण संस्कृति और पारंपरिक धार्मिक आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें माताएं अपनी संतान के मंगल और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं।
