नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शिक्षको,आधार पंचायत सेवा कर्मचारी,और ग्रामीण स्वास्थ्य सयोंजक का दबदबा….
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कर्तव्य की मिसाल उत्कृष्ट कार्यों के लिए शिक्षक,पंचायत सेवा कर्मचारी और स्वास्थ्य संयोजक सम्मानित…..
पखांजूर – नक्सल प्रभावित और अंदरूनी क्षेत्र में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद लगातार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर लोगों को बेहतर सेवा देने वाले शासकीय कर्मचारियों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया गया। प्राथमिक शाला बांगो घोड़िया के शिक्षक खोकन मंडल एवं शिक्षिका श्यामा ठाकुर, सीतराम माध्यमिक शाला के शिक्षक रूपधर उइके, छोटेबेटिया आधार पंचायत सेवा के कर्मचारी बीरू हालदार तथा सीतराम स्वास्थ्य केंद्र के ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक सुजीत पाल को उनके उत्कृष्ट कार्यों और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जिला प्रशासन की ओर से प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। यह सम्मान 15 अगस्त को प्रदेश के मंत्री टंक राम वर्मा के करकमलों से प्रदान किया गया।
स्कूल को बेहतर बनाने में शिक्षकों की अहम भूमिका
प्राथमिक शाला बांगो घोड़िया के शिक्षक खोकन मंडल एवं शिक्षिका श्यामा ठाकुर ने शिक्षण कार्य के साथ विद्यालय की साफ-सफाई, स्वच्छता, स्कूल सौंदर्यीकरण और विद्यार्थियों की पढ़ाई को बेहतर बनाने में विशेष योगदान दिया। शिक्षकों ने विद्यालय परिसर को स्वच्छ एवं आकर्षक बनाने के साथ बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए।
उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, अनुशासन, पढ़ाई और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया। वहीं सीतराम माध्यमिक शाला के शिक्षक रूपधर उइके ने भी अंदरूनी क्षेत्र में लगातार अपनी सेवाएं देकर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दिया।
बारिश में भी नहीं टूटा कर्तव्य का सिलसिला….
इन शिक्षकों की कर्तव्यनिष्ठा का सबसे बड़ा उदाहरण बारिश के दिनों में देखने को मिला। खराब मौसम और कठिन आवागमन के बावजूद शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय पहुंचते रहे। कई बार उन्हें लकड़ी की नाव के सहारे जान जोखिम में डालकर विद्यालय तक पहुंचना पड़ा, लेकिन उन्होंने बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए अपनी ड्यूटी को प्राथमिकता दी।
अंदरूनी और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में इस तरह लगातार सेवाएं देना न केवल शिक्षकों की जिम्मेदारी और समर्पण को दर्शाता है, बल्कि क्षेत्र में कार्यरत अन्य शासकीय कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण है।
पंचायत सेवा कर्मचारी बीरू हालदार भी सम्मानित
छोटेबेटिया आधार पंचायत सेवा में कार्यरत बीरू हालदार को भी अंदरूनी क्षेत्र में ग्रामीणों को बेहतर एवं उत्कृष्ट सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सम्मानित किया गया,कठिन परिस्थितियों के बीच ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान और पंचायत स्तर की सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में उनके कार्यों की सराहना की गई।और उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
स्वास्थ्य विभाग में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक के रूप में सीतराम स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ सुजीत पाल भी लंबे समय से अंदरूनी क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ग्रामीणों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य का निरंतर निर्वहन करने के लिए उन्हें भी 15 अगस्त के अवसर पर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
नक्सल प्रभावित और अंदरूनी क्षेत्रों में काम करना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसके बावजूद शिक्षा, पंचायत और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े इन कर्मचारियों ने कठिन परिस्थितियों को चुनौती देते हुए अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी। उनके उत्कृष्ट कार्यों को जिला प्रशासन द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाना क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।
सम्मान मिलने से विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों, ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों में खुशी का माहौल है। वहीं यह सम्मान अंदरूनी क्षेत्रों में पूरी निष्ठा के साथ सेवा दे रहे अन्य शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा और हौसले का संदेश माना जा रहा है।
वही इन अंदरूनी और दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों के सामने इन दिनों ऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था बड़ी चुनौती बन गई है। शासन द्वारा VSK App के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था लागू की गई है, लेकिन नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या के चलते यह व्यवस्था जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से संचालित नहीं हो पा रही है।ऐसे में शिक्षक समय पर स्कूल पहुंचने के बावजूद ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाते, जिससे उन्हें तकनीकी परेशानी के साथ-साथ अनावश्यक चिंता का सामना करना पड़ता है।शिक्षकों का कहना है कि जहां नेटवर्क की सुविधा ही उपलब्ध नहीं है, वहां ऑनलाइन अटेंडेंस की अनिवार्यता व्यवहारिक समस्या बन रही है।नेटवर्क व्यवस्था दुरुस्त होने तक शिक्षकों के लिए वैकल्पिक उपस्थिति प्रणाली लागू की जानी चाहिए।शिक्षकों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि अंदरूनी क्षेत्रों की भौगोलिक और नेटवर्क संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल ऑफलाइन या अन्य वैकल्पिक अटेंडेंस व्यवस्था की जाए।
