धमतरी – जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण सोंढूर, दुधावा एवं गंगरेल एसोसिएशन के कैचमेंट क्षेत्र में जल की आवक तेजी से बढ़ रही है। सुसाइट के सुरक्षित संचालन, बाढ़ प्रबंधन और जल स्तर को सुरक्षित सीमा में बनाए रखने के उद्देश्य से जल संसाधन विभाग द्वारा सु व्यवस्थित और नियंत्रित जल प्रबंधन किया जा रहा है।
वर्तमान यूनेस्को को देखते हुए सोंढूर मठ से नहर के माध्यम से नियंत्रित रूप से पानी दुधावा किले की ओर से समापन किया जा रहा है। साथ ही जल आवक में निरंतर वृद्धि को ध्यान में रखा गया सोंढूर से दुधावा तथा दुधावा से गंगारेल की ओर से क्रमबद्ध रूप से जल का अल्ट्रासाउंड (ट्रांसफर) किया जा रहा है, ताकि त्रिल्यों के ऑपरेशन सुरक्षित एजल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान में दुधावा की कुल क्षमता 81.14 प्रतिशत पर है, जहां 4,440 क्यूसेक पानी की आवक दर्ज की गई है। सोंढूर फोरम 75.02 प्रतिशत क्षमता पर है, जहां 2,205 क्यूसेक जल की आवक हो रही है। वहीं गैंगरेल की स्थापना 50.04 प्रतिशत क्षमता पर है तथा 6,261 क्यूसेक जल की आवक दर्ज की जा रही है। जल विभाग के अधिकारियों की स्थिति पर लगातार पर्यवेक्षकों की आवश्यकता होती है, जिनके अनुसार जल भंडार एवं जल प्रबंधन के नियम बनाए जा रहे हैं।
यहां सोंढूर फोरम के कैचमेंट क्षेत्र में लगातार वर्षा हो रही है, फोरम में 15,256 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है, जिसमें लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। इस स्थिति को देखते हुए उच्च अधिकारियों के निर्देश पर सोंढूर बांध से 5,000 क्यूसेक पानी नियंत्रित रूप से नदी में छोड़ा जा रहा है। आवश्यकता पर इस जल उत्पादक की मात्रा अनुपात भी जा सकता है। इसके मद्देनज़र सोंढूर नदी के तटवर्ती घाट के लिए अनुरोध जारी किया गया है।
इसी प्रकार दुधावा झील में वर्तमान में 7,454 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है, जिससे 3,000 क्यूसेक पानी नदी में बह रहा है, जो आगे गंगरेल झील में डूबा हुआ है। जल संसाधन विभाग द्वारा संपूर्ण स्थिति पर सतत निगरानी रखते हुए सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाये जा रहे हैं।
जल संसाधन विभाग से प्राप्त नवीनतम जानकारी के अनुसार आज दोपहर 2.00 बजे गंगरेल (रविशंकर सागर) का रिकॉर्ड 344.12 मीटर दर्ज किया गया। मौजूदा समय में 12,522 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है, जबकि 150 क्यूसेक पानी खत्म हो रहा है। संस्था ने अपनी कुल स्टोरेज क्षमता का 50.86 प्रतिशत तक भुगतान किया है। लगातार बढ़ रही जल आवक को देखते हुए विभाग द्वारा स्थिति पर सतत निगरानी रखी जा रही है तथा आवश्यक आकलन पर जल विक्रेताओं को चरणबद्ध एवं नियंत्रित रूप से स्केल किया जा सकता है।
रेजिडेंट श्री अविनाश मिश्रा ने संस्थाओं, नदी-नालों एवं जल प्रवाह वाले क्षेत्र के आसपास के निवासियों से विशेष रूप से सोसायटी की अपील की है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति तेज बहाव वाले पानी को पार करने का प्रयास नहीं कर सकता और न ही नदी-नालों के किनारे के मछुआरों को छोड़ सकता है। उन्होंने बच्चों और पशुपालकों से अपने जंगल को सुरक्षित स्थान पर रखने का आग्रह किया है।
अभियोजकों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल जिला प्रशासन एवं संबंधित सम्मिलन द्वारा आधिकारिक तौर पर जारी करें। उन्होंने कहा कि किसी भी संकट की स्थिति या असामान्य जल प्रवाह की जानकारी से जिला आपातकालीन नियंत्रण कक्ष या स्थानीय प्रशासन को नुकसान हो सकता है, ताकि समय पर आवश्यक राहत एवं सुरक्षा संबंधी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिले में एसोसिएट्स, तकनीकी मानक और सुरक्षा पैनल के संचालन को सुनिश्चित किया जा रहा है और विघटन की सुरक्षा का दायित्व है।
भारी बारिश के बीच जलाशयों का सुरक्षित संचालन, सोंढूर बांध से 5,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया
