विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस पर अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन जागरूकता कार्यक्रम सम्पन्न

बिलासपुर – अटल बिहारी वाजपेयी ट्रस्ट द्वारा 21 मार्च 2026 को विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस के अवसर पर एक भव्य एवं सार्थक ऑनलाइन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश-विदेश से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य डाउन सिंड्रोम से जुड़े बच्चों के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना, उन्हें समान अवसर प्रदान करने की आवश्यकता पर बल देना तथा समावेशी शिक्षा (समावेशी शिक्षा) को बढ़ावा देना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत एवं परिचय सत्र से हुई, जिसमें विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इसके पश्चात विभिन्न वक्ताओं ने अपने-अपने अनुभव एवं विचार साझा किए।

विशेष शिक्षिका एवं एक विशेष बालक की माता शिखा भार्गव (अहमदाबाद) ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यदि परिवार का सहयोग और सही मार्गदर्शन मिले तो डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्चे भी समाज में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। कोलकाता की सोहिनी बसु सरकार, डॉ. पिंकी गोस्वामी (गुरुग्राम), श्रद्धांजलि दासगुप्ता (मनोवैज्ञानिक एवं आर्ट थेरेपिस्ट), पेनु कुमारी (क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, मुरादाबाद) एवं आशिता माथुर (फरीदाबाद) ने मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहारिक समर्थन एवं प्रारंभिक हस्तक्षेप के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

नोएडा की छात्रा दिशिता भाटिया एवं अन्य युवा प्रतिभागियों ने भी अपने विचार प्रस्तुत करते हुए समाज में संवेदनशीलता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। विभिन्न शहरों से जुड़े वक्ताओं जैसे तनया उपाध्याय (कोलकाता), पंखुरी अग्रवाल (भोपाल), कैप्टन डॉ. दिनिशा भारद्वाज सिंह (नई दिल्ली), अर्चना ईश्वरदासन (तमिलनाडु), मौमिता भट्टाचार्य (कोलकाता) एवं मेघना साहनी (देहरादून) ने शिक्षा, काउंसलिंग एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए।

हैदराबाद की स्वाति त्रिपाठी, चेन्नई की सुजाता सुरेश तलुपुरु, कोलकाता की बृंदाश्री हाजरा, टोरंटो (कनाडा) की सुमनप्रीत कौर, दिल्ली की प्रो. रश्मि भारद्वाज, भिलाई की खुशबू पाठक, अंबाला के डॉ. कोकिल कंसरा, लंदन की एडवोकेट ऋषिका, कोलकाता के निर्मल सरकार, पुणे की डॉ. पूजा मिसल, टोरंटो की श्रेया संघवी एवं जोधपुर की वीना हरवानी सहित कुल 25 से अधिक अतिथियों ने कार्यक्रम में भाग लेकर अपने विचार रखे।

सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि डाउन सिंड्रोम से जुड़े बच्चों को “दया” नहीं, बल्कि “अवसर” की आवश्यकता है। उन्होंने समाज से अपील की कि इन बच्चों को मुख्यधारा में शामिल कर उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उचित संसाधन एवं सम्मानजनक वातावरण प्रदान किया जाए।

कार्यक्रम के दौरान अटल ज्ञान सेतु अभियान की भी जानकारी दी गई, जिसके अंतर्गत समाज के सक्षम वर्ग से पुरानी उपयोगी पुस्तकों का संग्रह कर उन्हें ग्रामीण एवं जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। इस पहल को समावेशी शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा यह संकल्प लिया गया कि भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास निरंतर जारी रखा जाएगा।

कार्यक्रम का संचालन अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी से रश्मि घाटवई द्वारा अत्यंत प्रभावशाली एवं सुव्यवस्थित ढंग से किया गया।