परिवर्तन जागरूकता पर आधारित कार्यशाला में कहा गया है- कृषि औद्योगिकीकरण, वनों का पतन और ग्रीन हाउस गैस इसके प्रमुख कारक

कांकेर – छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र के निर्देशानुसार समुद्री एवं जलवायु परिवर्तन विभाग वनमंडल कांकेर द्वारा आज वृत्तांत सांस्कृतिक आवास अभ्यारण्य पर आधारित कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें क्लाईमेट के नियंत्रण एवं संग्रहालयों के संबंध में शोधकर्ताओं ने विचार किया। कार्यशाला में पुजारी निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने कहा कि वैश्विक जलवायु एक वैश्विक समस्या है, जिसमें भारत सहित विश्व के अधिकांश देश बर्बाद हो रहे हैं।ग्राम माकड़ी के निजी होटल में आज ऑर्गेनाइज़ेशन वर्कशॉप में कलेक्टर ने कहा कि यदि मुन्श्या सहित सभी प्राणियों का भविष्य सुरक्षित करना है तो इसके लिए अभी से ठोस कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है। दो से तीन दशक में तापमान में दो डिग्री से वृद्धि पूरे ब्रह्माण्ड के लिए ध्यान देने योग्य है। उन्होंने कहा कि यह वन विभाग रणनीति तैयार कर कई उपाय कर रहा है, इसे रोकने की जिम्मेदारी सिर्फ वन विभाग की नहीं है, बल्कि संपूर्ण विभाग और प्रत्येक व्यक्ति की है। कलेक्टर ने कहा कि प्लास्टिक को अनुसंधान करने के लिए, वर्षा के मौसम में अनुसंधान करने के लिए प्रमाणित करने के लिए, अवशेषों में पराली को नष्ट नहीं करने के लिए, जंगलों में आग लगाने के लिए नहीं, रसायन के स्थान पर जैविक खाद्य संरचना के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर अनुसंधान की दिशा में स्थायी प्रयास करने की अत्यंत आवश्यकता है। इसके पहले मुख्य वन संरक्षक, दुर्ग वृत्त श्री राजेश चंदेले ने कहा था कि कभी-कभी वन संरक्षक दुर्ग वृत्तांत में रहने वाले वन-पौधों की संख्या में काफी कमी आ गई है और इसके लिए सभी वर्ग को आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि वन के दृष्टिकोण से ही जलवायु परिवर्तन संभव है और आज की युवा पीढ़ी को यह समझाने की अत्यंत आवश्यकता है।

वक्ता ने बताया- वैश्विक तापमान में भारत की भूमिका 4.8 प्रतिशत

वर्कशॉप में ग्लोबल ग्लोबल एवं नेचर प्रोटेक्शन विषयों पर गेस्ट स्टूडियो ने अपने विचार रखे एवं ग्लोबल टेप के सिद्धांतों को नियंत्रित करने के लिए अपना अभिमत व्यक्त किया। इसी कड़ी में कृषि वैज्ञानिक श्री कोमल केराम ने अतिथि वक्ता के रूप में ‘आस्पेक्ट्स एंड क्लिमेट चांग’, पॉलिटेक्निक के कार्यशाला डॉ. शैलेन्द्र सिंह ने ‘नॉन कन्वेन्शनल एनर्जी ऑफ एनर्जी’, डॉ. संदीप कश्यप ने ‘एनवायरमेंटल अवेयरनेस’, श्री शरतचंद्र ने ‘डिस्ट्रिक्ट क्लाइमेट थ्रो डी स्थिर’, श्री सिद्धार्थ ने ‘सप्लाई चांग एंड इट्स इम्पैक्ट ऑन क्लिमेट’, अर्थशास्त्री प्रणिता ने ‘एजुकन क्लाइमेट एंड इट्स रिलेशन विथ क्लाइमेट कंपनी’ और अनुभा उपाध्याय ने ‘स्टेटिक एंड सब्जेक्टल सिरीज’ पर अपने विचार रखे ग्लोबल मार्केट के रिसर्च कम करने के लिए टेक्नोलॉजी के बारे में विस्तार से बताया। अधिकांश कलाकृतियों ने प्रकृति संरक्षण में मानव की भूमिका, जलवायु परिवर्तन के वैकल्पिक उपायों और जलवायु परिवर्तन पर प्रकाश डाला। एक वक्ता ने बताया कि वैश्विक जलवायु में भारत की भूमिका 4.8 प्रतिशत है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा अर्थ रिट्रीट फाउंडेशन के संयुक्त परिसर में आयोजित छात्रावास में सामान्य वन मंडल के सलाहकार कांकेर श्री त्रियात्री गोयल, वन मंडल के सलाहकार भानुप्रतापपुर पश्चिम श्री हेमचंद पहाड़े, भानुप्रतापपुर पूर्व श्री ऋषभ जैन सहित विभिन्न वनस्पतियों के अधिकारी तथा वन विभाग के भंडार और रेंजर, उप रेंजर आदि शामिल थे।