खबर का असर – बीजापुर में PMGSY का भ्रष्टाचार उजागर

“जिला मुख्यालय के पास ही भ्रष्टाचार का पुल: घटिया पुलिया को खुद विभाग ने तोड़ा, कमीशनखोरी का खेल बेनकाब!”*

❗दैनिक  अजय उजाला की खबर के बाद हरकत में आया PMGSY विभाग

❗गुणवत्ताहीन पुलिया को खुद तोड़ना पड़ा – भ्रष्ट निर्माण की खुली पोल

बीजापुर जिले के गोरना में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बन रही पुलिया में भारी भ्रष्टाचार सामने आया था। निर्माण की तस्वीरें सामने आते ही साफ हो गया कि काम में गुणवत्ता की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।
पुलिया बनने से पहले ही उखड़ने लगी थी।

किनारों से सीमेंट झड़ रहा था और अंदर से रेत-गिट्टी बाहर दिखाई दे रही थी। यानी निर्माण में मानकों की पूरी तरह अनदेखी

*मिलीभगत का खेल*

सूत्रों के मुताबिक इस पूरे निर्माण में ठेकेदार और इंजीनियर के बीच कमीशन का खेल चल रहा था।
कमीशन बचाने के लिए सीमेंट कम और रेत ज्यादा डालकर सरकारी पैसों की खुली लूट की जा रही

दैनीक अजय उजाला ने घटिया निर्माण को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी जिसके बाद विभाग जागा और गुणवता को दरकिनार कर बने पुलिये को धरासाई किया गया

*अब उठ रहे बड़े सवाल*

👉 10 दिन से भी ज्यादा चला पुलिया निर्माण का कार्य , मजदूरों के मुताबिक इस दौरान इंजीनियर ने 2-3 बार निरीक्षण किया, फिर भी घटिया काम कैसे पास हुआ?

👉 क्या इंजीनियर का निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता था?

👉 अगर मीडिया खबर नहीं दिखाती तो क्या यही पुलिया जनता के लिए खतरा बनता ?

*जनता में आक्रोश*

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ये मामला सामने नहीं आता तो यह पुलिया कभी भी बड़ा हादसा कर सकती थी। अब सवाल सिर्फ एक पुलिया का नहीं, बल्कि पूरे PMGSY में चल रहे सिस्टम पर उठ रहा है।

*पहले घटिया बनाओ, फिर पकड़ में आने पर तोड़ दो — क्या यही है PMGSY का विकास मॉडल?*