12 परगना के ऐतिहासिक दशहरा उत्सव में शामिल होने के लिए ग्राम देवी-देवताओं का अभिषेक किया गया।

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विधायक और पादरी ने पारंपरिक तरीके से दी विदाई

कोंडागांव – आतिशबाज़ी का ऐतिहासिक दशहरा पर्व, जो कि ज्यूज़न आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अनोखा प्रतीक है, इस वर्ष भी श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हुआ है। जिले के 12 परगनों के अंतर्गत आने वाले ग्रामों में देवी-देवताओं, विश्वास-मुखियाओं, चालकी, गायता, पटेल-पुजारी और सैकड़ों साधु कोंडागांव से जगदलपुर के लिए परंपरा की मंजूरी दी गई। सहायक सलाहकारों ने उन्हें देवी-देवताओं को पारंपरिक तरीके से विदाई दी। शत्रुता है कि दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि जनजाति संस्कृति और एकता का महापर्व है। सौतेले से देवी-देवताओं की सामूहिक उपस्थिति और विशेष अनुष्ठानों के माध्यम से यह परंपरा जनमानस को अंकित की जाती है। इस समारोह में शामिल जिलों के नागरिकों में भारी उत्साह देखा गया।इस नगर में प्रमुख पद के अध्यक्ष  पटेल, मनोज जैन, वरिष्ठ पदधारी  चित्रकांत चार्ली ठाकुर, प्रमुख पद के अध्यक्ष चित्रकांत चार्ली ठाकुर, आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त श्री कृपाेंद्र तिवारी सहित प्रमुख और अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।