महासमुंद – छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने राज्य की भाजपा सरकार पर कड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर यह सरकार गरीबों और किसानों के हितैषी होने का दिखावा करती है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं के अधिकारों को छीनने में पीछे नहीं रहती। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन में स्वीकृत समोदा-अछोला समूह जल प्रदाय योजना, जो 48 गांवों में पानी आपूर्ति हेतु बनाई गई थी, उस पर भाजपा सरकार ने रोक लगाने जैसी कार्यवाही शुरू कर दी है। यह कदम सीधे तौर पर ग्रामीणों के अधिकारों का हनन है। श्री चंद्राकर ने कलेक्टर को पत्र लिखकर मांग की है कि पिकाडिली एग्रो इंडस्ट्रीज द्वारा निर्मित की जा रही शराब फैक्ट्री के लिए समोदा बैराज से जल आपूर्ति को तत्काल प्रभाव से रोका जाए, और निर्माणाधीन इंटेकवेल को बंद किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ग्रामीणों के हक के जल को शराब निर्माण में लगाया गया, तो 48 गांवों के लोग मिलकर उग्र आंदोलन करेंगे। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि योजना के अंतर्गत 70 हजार की आबादी वाले 15238 परिवारों को 12909 नल कनेक्शन के जरिए पानी देने की योजना थी। लेकिन इसी जल स्रोत से बीयर और शराब बनाने के लिए पानी दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को पानी देना असंभव हो जाएगा क्योंकि शराब उत्पादन में भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। समोदा बैराज की कुल जल क्षमता 29.91 एमसीएम है, जिसमें से 19 एमसीएम पानी पहले ही रायपुर जिले के खरोरा स्थित अडानी प्लांट को दिया जा रहा है। शेष पानी से खरोरा नगर पंचायत और महासमुंद विधानसभा के 48 गांवों को जल आपूर्ति प्रस्तावित है। ऐसे में शराब फैक्ट्री को पानी देना जनहित के खिलाफ है। श्री चंद्राकर ने यह भी कहा कि इस योजना की शुरुआत कांग्रेस शासनकाल में ग्रामीणों की पेयजल और निस्तारी समस्या को ध्यान में रखते हुए की गई थी। आज भाजपा की नीतियां इस योजना को पटरी से उतार रही हैं।इसके अलावा उन्होंने यह भी उजागर किया कि कई ग्रामों की कृषि भूमि डुबान क्षेत्र में आ गई है, और किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं दिया जा रहा, जबकि एक शराब फैक्ट्री को पानी मुहैया कराया जा रहा है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि सरकार ने ग्रामीणों के जल अधिकारों की अनदेखी की, तो व्यापक जनआंदोलन होगा।
