“मुख्यमंत्री ग्राम सड़क इकाई का सारंगढ़ स्थानांतरण : महासमुंद से उपेक्षा, विकास कार्यों को झटका – विनोद चंद्राकर

महासमुंद –  छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व संसदीय सचिव एवं पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क इकाई के कार्यालय को महासमुंद से स्थानांतरित कर सारंगढ़ भेजने के निर्णय को जिले के साथ अन्यायपूर्ण व भेदभावपूर्ण कदम करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की जिले केप्रति उदासीनता और सौतेला व्यवहार का प्रतीक है।श्री चंद्राकर ने स्पष्ट किया कि जिले में आज भी कई ग्रामीण सड़कें जर्जर हालत में हैं, जिन पर चलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने भोरिंग से अछोला मार्ग का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी बदहाल सड़कों की मरम्मत व उन्नयन के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क इकाई की आवश्यकता थी, परंतु “यहां कोई काम नहीं” का हवाला देकर इस महत्वपूर्ण दफ्तर को जिले से हटा दिया गया है। पूर्व विधायक ने याद दिलाया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के सड़क नेटवर्क को सशक्त बनाने के लिए इस इकाई को स्थापित करवाया था, ताकि गांवों को पक्की और सालभर उपयोगी सड़कों से जोड़ा जा सके। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना (एमएमजीएसवाई) के तहत बनने वाली सड़कों, पुलों और उनके रखरखाव के कार्य इसी इकाई के जिम्मे होते हैं। परंतु इस इकाई के स्थानांतरण से अब जिले के विकास कार्यों पर असर पड़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क कनेक्टिविटी प्रभावित होगी। श्री चंद्राकर ने इस निर्णय को भाजपा सरकार की ओर से महासमुंद के प्रति भेदभावपूर्ण नीति का उदाहरण बताते हुए इसकी निंदा की और मांग की कि मुख्यमंत्री ग्राम सड़क इकाई को पुनः महासमुंद में स्थापित किया जाए।