धमतरी – आत्मनिर्भर भारत में महिलाएं आज हर क्षेत्र में पुरुष कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। ऐसी ही आत्मनिर्भरता से अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाएं, धमतरी विकासखंड के ग्राम पंचायत सोमरम की श्रीमती वेदकुमारी साहू ने। वेदकुमारी कहती हैं कि ”सपनों की दुकान जब मिट्ठी से सजे, तो जिंदगी खुद ब खुद हो जाती है।” वे बताते हैं कि वे एम.ए. जब तक आप पढ़ चुके हैं और अपने पति के साथ मिलकर काम कर रहे थे। माऊथ-करते ही उनके मन में व्यवसाय करने की इच्छा हुई। तब वेदकुमारी को छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण रोजगार मिशन ”बिहान” की जानकारी मिली और वे जय मां दुर्गा महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ें। इसके बाद समर्थित महिला समर्थित संगठन रुद्री के माध्यम से पर्यटक स्टोर ऑपरेशन के लिए व्यक्तिगत ऋण के लिए प्रमुख लाख रुपये और बैंक लिंकेज ऋण आठ लाख रुपये भी लिया गया। इस राशि से उन्होंने गांव नवजागरण चौक के पास पर्यटक भंडार शुरू किया। इस प्रिय स्टोर में चूल्हे, बिंदी, क्रीम, पाउडर, मेंहदी, सिन्दूर, हेयर क्लिप, आर्टिफ़िशियल स्टायरो, पर्स, उपहार सामग्री आदि उत्पाद स्टॉक में। श्रीमती वेदकुमारी त्योहारों के समय में कश्मीरी छात्रावासों में विशेष छूट देती हैं और त्योहारों के संगीत साज-सज्जा के साथ बेचती हैं, जिससे उनकी बिक्री होती है। अब उनकी विदेशी दुकान स्थानीय महिलाओं की पहली पसंद बन गई है। इससे वेदकुमारी को हर महीने 10 से 12 हजार डॉलर का शुद्ध स्टॉक एक्सचेंज मिलता है। इतना ही नहीं गाँव और आसपास के क्षेत्र में वेदकुमारी ठेले के माध्यम से भी मित्र सामग्रियाँ बेचती हैं, जिसमें उनके पति सहायता करते हैं। इससे उनके घर की बर्बादी तो पूरी हो ही जाती है, इसके साथ ही बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों के लिए राशि की बचत भी हो जाती है।वेदकुमारी का आशिक स्टोर गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गया है। श्रीमती वेदकुमारी गांव की अन्य महिलाओं और युवतियों को भी अपने व्यवसाय की पहचान और मार्केटिंग के बारे में जानकारी देती हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं। अब वह गांव की महिला के रूप में जानी मानी हैं। वेदकुमारी यह भी बताती हैं कि स्थानीय पंचायत और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मेलों और प्रदर्शनी में स्टॉल लगाने के लिए प्रोत्साहन मिला। ग्रुप के माध्यम से बाजार से जुड़ें रखने में भी सहयोग करें। वेदकुमारी ने यह सिद्ध कर दिया कि व्यवसाय का आकार नहीं, सोच और महत्व का मतलब है। एक छोटे से पर्यटक स्टोर से उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि अपने सामान और पहचान को भी भुनाया-संवारा।
