सुशासन तिहार में धमतरी को मिली कला केंद्र की आजादी।

महापौर श्री रोहरा ने ”ध्रोहर” का शुभारंभ किया

बच्चे और युवा मार्केटप्लेस, ड्रीम को आगे की उड़ान।

धमतरी – विष्णु देव सरकार का सुशासन तिहार धमतरी के युवाओं और बच्चों के सपनों को उड़ान की शुरुआत की पेशकश लेकर आया है। सुशासन तिहार के दौरान मिले दोआवेदन पर तेजी से कार्रवाई करते हुए धमतरी शहर में कला केंद्र ”धरोहर” शुरू किया गया है। शहर में राम मंदिर के सामने इतवारी बाजार परिसर में कला केंद्र ”ध्रोहर” का उद्घाटन कलश स्थापना समारोह में महापौर श्री रामू रोहरा ने किया। इस अवसर पर निगम आयुक्त श्रीमती प्रिया गोयल सहित स्थानीय व्यापारी और शहरी निवासी भी मौजूद हैं।

इस कला केन्द्र ”धरोहर” में बच्चों और युवाओं को विभिन्न कलाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की व्यवस्था की गयी है। यहां बच्चों को न सिर्फ अपनी पसंद की विधा को समझने का मौका मिलता है, बल्कि वे अपने शौक को भविष्य में कैरियर में शामिल करने का सपना भी देखते हैं। इस केंद्र में अलग-अलग प्रशिक्षण कक्ष तैयार किए जा रहे हैं, जहां नृत्य, संगीत, थीम्स, फोटोग्राफी, जुंबा, योग, नाटक, रंगोली, पेंटिंग, पेंटिंग कला, क्ले आर्ट, बांसुरी, तबला, हारमोनियम, बैंजो आदि केन कलाओं के साथ-साथ वाद्य कला का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। कला केंद्र में लोक संगीत, पियानो और गिटार वादक के तरीके भी सिखाए जाएंगे।

कला केंद्र ”ध्रोहर” का उद्घाटन करते समय महापौर श्री रोहरा ने कहा कि यह कला केंद्र केवल बच्चों के लिए एक प्रशिक्षण स्थल होगा, बल्कि यह उनके सपनों को उड़ान देने वाला केंद्र भी साबित करेगा। नगर निगम की यह पहली निश्चित रूप से धमतरी के भविष्य को संवारने में सहायक होगी। मेयर ने केंद्र के ऑपरेशन कर्ता को विशेष बधाई देते हुए कहा कि यह केंद्र शहर के युवाओं के लिए ‍केंद्र के ‍ऑपरेशन ‍कार्यकर्ता को ‍विशेष बधाई देता है। आने वाले समय में यह केन्द्रित स्थानीय प्रतिभाओं को पहचानने का कार्य है।

कार्यक्रम में मौजूद स्थानीय आदिवासियों ने भी सुशासन तिहार पर शासन-प्रशासन की प्रशंसा के लिए अपनी मांग पूरी की। स्थानीय निवासियों ने कहा कि धमतरी में ऐसे कला केंद्र की शुरुआत एक नए युग के आगमन का संकेत है। अब यहां पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ गाने, डांस, योगा, फोटोग्राफी जैसे और कई चीजें बच्चे सीखेंगे। इससे पढ़ाई-लिखाई और कला-संस्कृति, खेल-कूद को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय निवासियों ने कहा कि अपनी संस्कृति-अपनी कला को बच्चों और युवाओं के सामूहिक अवशेषों से सीखने और इन विधाओं में अपना भविष्य बनाने के लिए भी प्रेरित करें।