धमतरी जिले में जीआईएस आधारित जल संरक्षण योजना के लिए उत्कृष्टता पुरस्कार मिला।
पूर्व रिकार्डर ने टीम धमतरी का बॅज़ॅनल्ड जैकेट, हार्दिक शुभकामनाएँ।
धमतरी – धमतरी जिले में जीएमएस आधारित जल संरक्षण योजना के सफल संचालन के लिए जिले की पूर्व डॉक्टर श्रीमती नम्रता गांधी को प्रशासन में लोक प्रशासन के लिए उत्कृष्ट प्रधानमंत्री पुरस्कार 2023 से सम्मानित किया गया है। 21 अप्रैल को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित सिविल सेवा दिवस समारोह में श्रीमती गांधी को यह पुरस्कार प्रदान किया गया। श्रीमती गांधी ने पुरस्कार प्राप्त करने के बाद इसे टीम धमतरी को समर्पित किया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा है कि जल संरक्षण और फसल चक्र परिवर्तन जैसे व्यापक विषयों पर सफलता केवल टीम वर्क से ही संभव है। सभी की भागीदारी से धमतरी में पानी से बचने और इसके प्रति उत्पादों की समीक्षा करने के लिए जिसने प्रयास किया, यह पुरस्कार उसकी सफलता को ही बताता है। श्रीमती गांधी ने जिले के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों, आरटीआइ, स्वयंसेवी संस्थाओं, औद्योगिक छात्रों के साथ-साथ सभी जिलावासियों को इस पुरस्कार समारोह में बधाई और शुभकामनाएं दी हैं और सभी के सकारात्मक सहयोग के लिए समूह से भी बातचीत की है।उल्लेखनीय है कि पूर्व नियुक्त डॉक्टर नम्रता गांधी के कार्यकाल के दौरान धमतरी जिले में पानी की समस्या पर ध्यान देते हुए जल संरक्षण पर विशेष काम किया गया। जीआईएस आधारित जल संरक्षण अभियान का संचालन किया गया। इसके तहत पानी के ठिकानों के लिए बनाई गई सभी स्टैमिना की जी-मैसेजिंग सेवाएं निकाली गईं। जिले के सभी हिस्सों में क्लार्ट एप के माध्यम से भूमि की आंतरिक संरचना का परीक्षण कर वहां के स्तरों में उपयोगी जल संरचनाएं बनाई गईं। पानी के बचाव के इस अभियान में जल शक्ति मंत्रालय के विशेषज्ञों की भी मदद ली गई। जिले के सभी बड़े साझीदारों, निजी घरों, रेस्तरांओं में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और रूफ टॉप अकॉर्डिंग बनाना अनिवार्य किया गया है। पानी की समस्या से पानी की समस्या को लेकर जिले में जल संरक्षण के लिए जरूरी बैठकें कर लोगों से राय ली गई, उन्हें रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, रूफटॉप पोर्टेबल, बेस्ट वॉटर मशीनरी की तकनीक की जानकारी दी गई। इस अभियान में जनजागरूकता के लिए जिला स्तर पर अधिकारियों, निजी संस्थानों, स्कूलों, संस्थानों की ओर से आयोजित की गई। रैलियों, प्रभात फेरियों, दीवार लेखन-नुक्कड नाटकों के साथ-साथ आधुनिक प्रचार-प्रसार के माध्यम से एनीमेटेड वीडियो-ऑडियो आदि के माध्यम से लोगों में जल संरक्षण की अलख जगाई गई। इस काम में स्वयं सेवी हॉस्टल की भी मदद ली गई। ग्रामोद्योग में फसल चक्र परिवर्तन के बारे में जागरूकता फैलाई गई। स्थानीय स्तर पर पेड़ लगाना, पेड़ों पर रक्षासूत्र बांधना, विवाह-ब्याह और उत्सवों में बहू-बेटियों को उपहार में उपाय जैसे सफल प्रयोग किए गए।इस अभियान की सफलता में पदस्थापना श्रीमती नम्रता गांधी के नेतृत्व में शहरी और सभी ग्रामीण लोगों ने वृद्धि-चढ़ाई में भाग लिया। रिज़ॉर्ट के तालाबों की सफाई से लेकर निस्तारी पानी और बारिश के पानी की विशेषता वाले उत्पाद बनाने, डेयरी सिस्टम विकसित करने के लिए भी योजना बनाई गई। भारतीय जैन संगठन, मित्र समूह जैसे कई स्वयं सेवी मित्रों ने भी इस काम में सहयोग किया। तालाबों को पुनर्जीवित कर जलधारण क्षमता बढ़ाई गई। तालाबों से निकली मिट्टी से सरकार की उर्वरा शक्ति में चोरी हुई। जिले की 225 औद्योगिक इकाइयों ने जल संयंत्रों के निर्माण के लिए बारिश के पानी को बचाने के लिए औद्योगिक इकाइयों के आधार पर उत्पादन किया। रईस में वॉटर फ्लो मीटर लगाए गए। आदिवासियों के जिले में जल संरक्षण के लिए तालाब और डबरियों का निर्माण किया गया। गांव के पास से नालों पर डाइक बनाई गई, ताकि गांव में पानी का डूब जाए। जिले में इस दौरान लगभग 11 लाख पौधे का संयंत्र लगाया गया।
