ओबीसी आरक्षण कोटे में कटौती वर्णव्यवस्था को लागू करने जैसा है : जुगनू चन्द्राकर।

बहुमत वर्ग को प्रतिनिधित्व से अलग कर देगा यह संसोधन अध्यादेश।

प्रमोद दुबे 

महासमुंद – त्रिस्तरीय पंचायतराज निर्वाचन 2025 के लिए छत्तीसगढ़ राज्य की भाजपा सरकार ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज (संशोधन) अध्यादेश 2024 पारित किया है जो एक तरह से वर्णवादी व्यवस्था को लागू करने जैसा है। इससे बहुमत वर्ग स्थानीय प्रतिनिधित्व से वंचित रह जायेगा और *संविधान का वह मूल भाव जिसमें कहा जाता है न लोक सभा न विधानसभा सबसे बड़ा ग्राम सभा* का अपमान है। जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर जुगनू चन्द्राकर ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज (संशोधन) अध्यादेश 2024 पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि इसका विश्लेषण महासमुंद जिला से करे तो पाते हैं महासमुंद ब्लाक (ग्रामीण) की कुल जनसंख्या 202970 है जिसमे 2024 की सर्वे मे ओ बी सी 126619 है और 2011 की सर्वे अनुसार st 49492, sc 32225 है ,इसी प्रकार महासमुंद जिला ( ग्रमीण) की कुल जनसंख्या 913613 है जिसमे वर्तमान सर्वे मे ओबीसी की जनसंख्या 531971 है तथा 2011 के अनुसार sc की जनसंख्या 120774 है एवं st की 270622 है । किन्तु ओबीसी प्रतिनिधित्व को आरक्षण मे भारी नुकसान हो रहा है जैसे की महासमुंद ब्लाक मे 105 ग्राम पंचायत मे मात्र 9 ग्राम पंचायत ओबीसी को मिल रहा है जबकि पिछली बार 26 सीट ग्राम पंचायत ओबीसी को मिला था इस प्रकार 16 सीट का नुकसान है। इसी प्रकार जनपद सदस्य मे कुल 25 सीट मे 2 सीट मिल रहा है जबकी पिछली बार 6 सीट मिला था इस प्रकार यहाँ 4 सीट का नुकसान हो रहा है और 5 ब्लाक जनपद अध्यक्ष मे एक भी सीट ओबीसी को नही मिल रहा है जबकि पिछली बार 1 सीट मिला था । अगर जिला पंचायत सदस्य की बात करें तो 15 सीट मे से 1 सीट ओबीसी को मिल रहा है एक ही सीट होने के कारण जो महिला आरक्षित होगा, जबकि पिछली बार 4 सीट मिला था । इसी प्रकार प्रदेश के 33 जिलों मे एक भी जिला पंचायत अध्यक्ष ओबीसी को नही मिल रहा है क्योंकि 33 का 50 %, 16.50 याने की 16 सीट जो कि प्रदेश के 16 जिला पेशा क्षेत्र के अन्तर्गत है अनुसूचित क्षेत्र में आता है। जिसके कारण इस बार 16 जिला पंचायत मे 16 अध्यक्ष का सीट st sc को मिल रहा है शेष 50% याने की 17 जिला पंचायत अध्यक्ष सामान्य हो जायेगा। जो st/sc पर भारी है। जबकी पूर्व के नियम अनुसार 8 सीट मिलता । इस प्रकार नया सशोधन नियम के मुताबिक एक भी जिला अध्यक्ष ओबीसी को नही मिलेगा । इस तरह ग्राम पंचायत के पंच सरपंच से लेकर प्रदेश के जनपद एवं जिला पंचायत अध्यक्ष के पदो पर ओबीसी को आरक्षण मे भारी नुकसान हो रहा है । ओबीसी समाज को इस आरक्षण नियम का खुल कर मजबूती के साथ विरोध करना होगा।