अत्याचार कर जनजातीय दिवस मनाने का औचित्य नहीं-विनोद।


जल, जंगल, जमीन बचाने लड़ रहे आदिवासियों पर अत्याचार कर भगवान बिरसा मुण्डा का अपमान ।

प्रमोद दुबे 

महासमुंद – भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर उन्हें प्रणाम करते हुए पूर्व संसदीय सचिव व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने कहा कि एक ओर पूरे प्रदेश में आदिवासियों पर अत्याचार हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की भाजपा सरकार जनजातीय दिवस मनाने का ढोंग कर रही है। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जननायक थे। उन्होंने आदिवासी समुदाय को जल, जंगल, जमीन के बारे में जागरूक किया और उन्हें अपने हक की लड़ाई लड़ने की प्रेरणा दी। श्री चंद्राकर ने विज्ञप्ति में कहा कि आज भगवान बिरसा मुंडा की प्रेरणा से आदिवासी समाज जल, जंगल, जमीन बचाने जूझ रहे हैं। अपने अधिकार व हक की लड़ाई लड़ने वाले आदिवासियों पर भाजपा की साय सरकार लाठियां बरसा रही है। जो आदिवासी सदियों से जंगलों के मालिक हैं, उन्हें बेदखल किया जा रहा है, ताकि अडानी की खदानें चल सकें। छत्तीसगढ़ में संविधान की पांचवी अनुसूची के क्षेत्र समाप्त कर दिये गये हैं? इसके तहत संरक्षित क्षेत्र से आदिवासियों को बेदखल किया जा रहा है। आदिवादियों के जल, जंगल और जमीन अधिकार के और पुरखों की विरासत को नष्ट कर रही है। ऐसे में काम भाजपा का जनजातीय गौरव दिवस मनाने का कोई औचित्य नहीं। कांग्रेस ने आदिवासियों के सम्मान व उनके अधिकार को सुरक्षित रखने विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में पेड़ नहीं काटे जाएंगे। भाजपा ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया था। लेकिन आज आदिवासियों के विरोध के बावजूद जंगल खाली करने को कहा जा रहा है और विरोध करने पर आदिवासी भाई-बहनों पर अत्याचार किया जा रहा है।