लंकापति रावण ने की थी शिव तांडव स्रोत की रचना।

प्रमोद दुबे
बागबाहरा – ग्राम एमके बाहरा मे साहू परिवार द्वारा आयोजित शिव महापुराण के विराम दिवश मे पंडित अरुण तिवारी ने आखिर कैसे हुई शिव तांडव स्त्रोत की रचना के संदर्भ मे उपस्थित श्रोतागण को कथा का रस पान कराया उन्होंने बताया शिव स्तुति करने से बड़े लाभ भक्तो को मिलते है.भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनके निमित्त कई पूजा-पाठ शास्त्रों में बताए गए हैं। लेकिन शिव तांडव स्त्रोत शिव पूजा से जुड़ी एक अद्भुत कथा है.

यदि किसी कार्य में बार-बार रुकावटें आ रही हैं और सफलता हाथ नहीं लग रही, तो यह स्त्रोत का नित्य पाठ करने से हर कार्य सफलता पूर्वक पूर्ण हो जाता है।मान्यता है कि जिन लोगों का आत्मबल कमजोर होता है, यदि वह शिव तांडव स्त्रोत का पाठ नित्य करते हैं तो उनको सकारात्मक परिणाम देखने को मिलता है और उनका मनोबल मजबूत होता है।शिव महापुराण के अनुसार शिव तांडव स्त्रोत का नित्य नियम पूर्वक पाठ करने से जीवन का दुःख, चिंता, अनेक प्रकार का भय और ग्रह दोष से शीघ्र मुक्ति मिलती है और शिव कृपा बरसती है।

कथा पश्चात यज्ञ हवन कर आम भंडारा का आयोजन हुआ. शिवमहापुराण की शोभायात्रा निकाली गई जिसमे गांव के प्रायः सभी घरो के द्वार पर रंगोली से सजावट कर शोभायात्रा का देर रात तक स्वागत किया गया जिसमे जयप्रकाश साहू जिलाध्यक्ष सहकारी समिति कर्मचारी संघ महासमुंद, मनीष चंद्राकर प्रबंधक मामाभाचा, मनोज भारद्वाज खल्लारी,कामता प्रसाद चंद्राकर, प्रेमलाल साहू, उमेश साहू, खेमराज सिन्हा,ओमप्रकाश साहू समेत सैकड़ो की संख्या मे ग्रामीणजन उपस्थित रहे.

