
महासमुंद – पूर्व संसदीय सचिव व पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने कहा कि सरगुजा के हसदेव अरण्य की कटाई का विरोध क्षेत्र के आदिवासी समुदाय द्वारा किया जा रहा है। विष्णुदेव सरकार द्वारा आदिवासियों को क्रूरता पूर्वक हकाला जा रहा है। आदिवासियों की देवभूमि के पेड़ काटे जाने का विरोध वे कर रहे हैं। कुछ दिन पूर्व 17 अक्टूबर से 30 सेमी से अधिक परिधि वाले 2.47 लाख पेड़ परसा ईस्ट केते बासन में काटे जाने की कार्रवाई का विरोध क्षेत्र के आदिवासी कर रहे हैं। आदिवासियों की आवाज को दबाने सरकार ने 400 सशस्त्र पुलिस बल भेजकर उन पर लाठीचार्ज कराया। जिससे सैकड़ों आदिवासी बुरी तरह से घायल हो गए हैं। श्री चंद्राकर ने विज्ञप्ति में कहा कि छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में पेड़ों को बचाने की लड़ाई आदिवासी समाज लड़ रहा हैं। इस घने जंगल के नीचे लगभग पाँच अरब टन कोयला दबा है। इस वजह से पूंजीपतियों और पूंजीवादी भाजपा सरकार की गिद्ध दृष्टि यहां टिकी है। छत्तीसगढ़ में भाजपा के सत्ता में आते ही पिछले साल दिसंबर में हसदेव अरण्य क्षेत्र में परसा पूर्व और केते बासन (पीईकेबी) के दूसरे चरण में विस्तार के तहत कोयला खदान के लिए पेड़ काटने की कवायद बड़े पैमाने पर हुई थी। तब भी यह काम पुलिस के सुरक्षा घेरे में किया गया था। इससे पहले वन विभाग ने मई 2022 में पीईकेबी चरण-2 कोयला खदान की शुरुआत करने के लिए पेड़ काटने की कवायद शुरू की थी, तब भी स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया था।

