राजिम – चौबेबांधा राजिम परसवानी सड़क मार्ग पर पिछले 15 दिनों से फिर से दैत्याकार हाईवा तेज रफ्तार दौड़ रही है जिससे स्कूली छात्र भयभीत है। बताना होगा कि सुबह से ही स्कूली छात्र छात्राएं धमतरी जिला तथा गरियाबंद जिला के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में इसी सड़क मार्ग का उपयोग करते हुए राजिम शहर के स्कूल कॉलेज में पहुंचकर विद्या अध्ययन करते हैं। स्कूल कॉलेज पहुंचने वाली यह सड़क मार्ग पहले से ही अत्यंत जर्जर है। बावजूद इसके फिर से लोडिंग गाड़ियां सरपट दौड़ रही है इससे न सिर्फ स्कूली छात्र-छात्राएं उनके प्रभाव क्षेत्र में आ रहे हैं बल्कि किसान से लेकर बड़ी संख्या में राहगीर परेशान दिखाई दे रहे हैं। बताना होगा कि राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 130 सी अटल चौंक चौबेबांधा तिराहा से लेकर चौबेबांधा पुल तक तकरीबन दो से ढाई किलोमीटर की दूरी है जो अत्यंत जर्जर है। पिछले वर्ष लगातार लोडिंग रेत हाईवा चलने के कारण सड़क टूट कर गड्ढे में तब्दील हो गए थे। यह गड्ढा बरसात में और भयंकर हो गया था। ग्रामीणों ने लगातार मांग किया तब कहीं जाकर गिट्टी डालकर उसे पैक किया गया था। गिट्टी के डालने के बाद गाड़ियां भसभसाकर कई बार गिर चुके हैं। अनेक लोगों को चोटें आ चुकी है तथा गाड़ी बिगड़ने पर उन्हें बनाने में भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। अभी भी लोग संभल संभल कर चलते हैं थोड़ी सी भी ध्यान इधर से उधर हुई तो नजरें हटी और दुर्घटना घटी कहावत चरितार्थ हो जाती है।
चार पहिया वाहन चलने से उड़ता है धूल का गुबार
लोगों का कहना है कि सड़क पक्की होते हुए भी कच्ची से भी खराब है। चारपहिया वाहन चलने के बाद तो धूल का गुबार उठ जाता है। गुरुवार की शाम 5:00 बजे एक-एक करके हाईवा ज्यो सरपट दौड़ीं, उसके बाद तो दोपहिया वाहन धारियों के आंखों के आगे अंधेरा छा गया था। इतनी मात्रा में धूल उड़ रहा था कि इससे आंखों की बीमारियां तथा अन्य परेशानियां होना लाजमी है। बताया गया कि कल एक छात्रा साइकिल से राजिम स्कूल पढ़ने के लिए आए लगातार लोडिंग वाहन चली और वह बच्ची धूल से स्नान कर लिए थे। उन्हें बेचैनी सी होने लगी और 6 पीरियड में से तीन पीरियड पढ़ने के बाद छुट्टी मांग कर वापस घर चली आई। वह उल्टी भी कर रही थी और पेट दर्द होने की बात कही। डॉक्टर को दिखाने के बाद ही उन्हें राहत मिली। यह तो एक बच्ची का रोड में चलने का हाले दिल नतीजा है। यहां तो सैकड़ों बालक बालिकाएं प्रतिदिन आना जाना कर रहे हैं। कितने छात्र-छात्राओं को परेशानी से गुजरना पड़ रहा है इनका असर सीधे उनके पढ़ाई पर पड़ रहा है। 10वीं 12वीं दोनों बोर्ड एग्जाम है। फरवरी मार्च में यह परीक्षाएं होनी है। विद्यार्थियों के लिए ऐसे में 1 मिनट का समय भी मायने रख रहा है तब सरकार इन छात्रों को अच्छी सड़क नहीं दे पा रही है और तो और उन्हें परेशानी देने में आमदा है, यह चिंता का विषय बन गया है।
यही सड़क नवीन मेला मैदान पहुंचती है
प्रदेश सरकार के द्वारा नवीन मेला मैदान के लिए पैरी नदी के किनारे 65 एकड़ जमीन आरक्षित किए हैं जिसे समृद्ध करने की बात कांग्रेस सरकार से लेकर भाजपा सरकार भी कह रही है। एक दो कामों को छोड़ दिया जाए तो इन सात आठ सालों में कोई विशेष काम नहीं हो पाया है बल्कि सड़कें और खराब हुई है। नवीन मेला मैदान पहुंचाने वाली यह प्रमुख सड़क मार्ग है। राजिम से 1 किलोमीटर की दूरी पर मेला मैदान शहर से ही लगा हुआ है। आने वाले 2025 के फरवरी मार्च महीने में कुंभ कल्प मेला लगेगा। यह बात अलग है कि यह मेला कहां पर लगेगी। लोगों का कहना है कि प्रदेश सरकार के द्वारा तैयारी करने की बात कह कर हर बार लोगों को बरगलाने का काम जरूर करती है। वैसे भी सुनने में आया है कि इस सड़क मार्ग को चौड़ी चिकनी तथा पेवर ब्लॉक लगाकर आकर्षक लुक दिया जाएगा। अब तो मेला भी मात्र तीन-चार महीने ही बचे हुए हैं ऐसे में सड़क का काम शुरू हो जाना चाहिए था। पर अभी तक श्री गणेश नहीं हुआ है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की सड़क बनेगी भी या फिर लोगों को परेशानियों से दो-चार होना ही पड़ेगा।
छात्रों ने कहा-शासन और सरकार हमारे भविष्य के साथ कर रही खिलवाड़
शाम को 4:00 बजे स्कूल से छुट्टी होने के बाद छात्र-छात्राएं अपने घर जाने के लिए साइकिल से ही निकले हुए थे। फोटो खींचते हुए देखकर इन छात्रों ने कहा कि इस सड़क को शीघ्र बनवाइए सर, हम लोग बहुत परेशान हैं। शासन और सरकार हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। यह सड़क वैसे भी जर्जर है और ऊपर से रेत हाईवा चला रही है। इस बार मेरा बोर्ड एग्जाम है। अच्छे नंबर नहीं आया तो आगे की पढ़ाई के लिए मुझे बड़ी दिक्कत होगी। यह भी बताना जरूरी है कि सड़क की जर्जर हालत को देखते हुए कुछ पालक बाइक से अपने बच्चों को स्कूल लाना और ले जाना का काम कर रहे हैं लेकिन जिनके पास सुविधा नहीं है वह छात्र-छात्राएं तो साइकिल से ही आना जाना कर रही है। अब बच्चे साइकिल से स्कूल जाने में कतरा रहे हैं जिसका एक्स्ट्रा भार पालकों के ऊपर पड़ रहा है।
