छत्तीसगढ़ के नवापारा राजिम सेवाकेंद्र में गीता जयंती के अवसर पर महामंडलेश्वरो के सानिध्य में गोष्ठी का आयोजन किया गया।

नवापारा राजिम :-  सेवाकेंद्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी पुष्पा दीदी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में महामंडलेश्वर ज्ञानस्वरूपानंद अक्रिय जी महाराज जोधपुर (राजस्थान), महामंडलेश्वर प्रेमानंद सरस्वती जी महाराज बॉम्बे (महाराष्ट्र ),ब्रह्मदत्त शास्त्री नवापारा राजिम,ब्रह्माकुमार नारायण भाई जी इंदौर (म. प्र.) श्रीमती फाखरा खानम दानी (प्राचार्य हरिहर शास. उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नवापारा), बी.के. बिंदु एवं बी.के.अंशु बहन ने श्रीमद्भागवत गीता पर अपने अपने विचार रखे।महामंलेश्वर अक्रिय जी महाराज ने कहा कि गीता हमे दिव्यता की ओर ले जाती है,जब तक आत्मा का ज्ञान नही होगा तब तक परमात्मा को नही जान सकते सत्य परमात्मा का ज्ञान मनुष्य को भटकने से रोकती है अतःगीता के ज्ञान को जीवन मे धारण करें जीवन सहज व सरल बन जायेगा। वही महामंलेश्वर प्रेमानंद महराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता नर को नारायण,कंकड़ को शंकर, जीव को शिव बनाने वाली ब्रह्मविद्या का नाम है जो हमे अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाती है।ब्रह्माकुमारी बहनो ने गृहस्थ व्यवहार को निभाते हुए राजयोग से पवित्र जीवन का ज्ञान देती है जो विकारो पर विजय प्राप्त कर आत्म संयम की साधना मेडिटेशन से सिखाती है।निश्चय ही यह ज्ञान और योग जीवन को दिव्यता की ओर ले जाती है। वही ब्रह्माकुमारी अंशु बहन ने गीता को जीवन का दर्पण कहा जिससे चरित्र और चित्रण बोध होता है। बीके बिंदु ने गीता की उत्पत्ति एवं गीता के सार तत्व का वर्णन किया। इंदौर से पहुचे ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने बताया कि गीता समूचे विश्व के आत्माओ की मन को निर्मल बनाने वाले जीवन जीने की कला सिखाने वाली मानव मात्र का एक ऐसा ग्रन्थ है जो भगवानुवाच है,सभी धर्म शास्त्रों की उत्पत्ति गीता से हुई है।जिसे सभी धर्मों के लोग मानते है। ब्रह्माकुमारी पुष्पा दीदी ने सभी संतो का स्वागत सम्मान किया कहा कि सभी के सहयोग से स्वर्णिम संसार का नवनिर्माण होगा ।इस अवसर पर नगरवासी,एवं संस्थान के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे।